शर्त थी
इस पल को जी ले,
भारत में ओर इंडिया में अंतर
भारत में गाँव है, गली है, चौबारा है.
इंडिया में सिटी है, मॉल है, पंचतारा है.
भारत में घर है, चबूतरा है, दालान है.
इंडिया में फ्लैट और मकान है.
भारत में काका है, बाबा है, दादा है, दादी है.
इंडिया में अंकल आंटी की आबादी है.
भारत में खजूर है, जामुन है, आम है.
इंडिया में मैगी, पिज्जा, माजा का नकली आम है.
भारत में मटके है, दोने है, पत्तल है.
इंडिया में पोलिथीन, वाटर व वाईन की बॉटल है.
भारत में गाय है, गोबर है, कंडे है.
इंडिया में सेहतनाशी चिकन बिरयानी अंडे है.
भारत में दूध है, दही है, लस्सी है.
इंडिया में खतरनाक व्हिस्की, कोक, पेप्सी है.
भारत में रसोई है, आँगन है, तुलसी है.
इंडिया में रूम है, कमोड की कुर्सी है.
भारत में कथड़ी है, खटिया है, खर्राटे हैं.
इंडिया में बेड है, डनलप है और करवटें है.
भारत में मंदिर है, मंडप है, पंडाल है.
इंडिया में पब है, डिस्को है, हॉल है.
भारत में गीत-संगीत व शास्त्रीय आलाप है.
इंडिया में डान्स है, कानफाडू पॉप है.
भारत में बुआ है, मौसी है, बहन है.
इंडिया में सब के सब कजन है.
भारत में पीपल है, बरगद है, नीम है.
इंडिया में वाल पर पूरे सीन है.
भारत में आदर है, प्रेम है, सत्कार है.
इंडिया में स्वार्थ, नफरत है, दुत्कार है.
भारत में हजारों भाषा हैं, बोली है.
इंडिया में एक अंग्रेजी ही बड़बोली है.
भारत सीधा है, सहज है, सरल है.
इंडिया धूर्त है, चालाक है, कुटिल है.
भारत में संतोष है, सुख है, चैन है.
इंडिया बदहवास, दुखी, बेचैन है.
क्योंकि …
भारत को देवों ने, वीरों ने रचाया है.
इंडिया को लालची, अंग्रेजों ने बसाया है.
इसलिए इंडिया नहीं भारत बोलो
सूचना-: उक्त लेख विभिन्न सोसियल मीडिया के साभार से लिया गया है । अर्थात कॉपी पेस्ट है । और हम इसे प्रमाणित नही करते है अतः केवल जानकारी के आधार पर संग्रहित किया जा रहा है - BLOGER
विश्व साड़ी दिवस : पर कविता
साड़ी...नारी का वो सबसे सुंदर परिधान जो प्रतीक है भारतीय संस्कृति का,
साड़ी
इक दिन जैसे ही मैंने अलमारी खोली
मेरी प्यारी साड़ी मुझसे ये बोली
सुनो ज़रा इक बात ये मेरी
बोलो कब आएगी बारी मेरी
पहने तुमनें कितनें परिधान
एक मेरा ही तुम्हें न आया ध्यान
कभी मुझे भी बाहर तो लाओ
मुझे भी पहन ज़रा घूम तो आओ
मुद्दतें हुईं कभी कहीं मैं गई नहीं
बेकार सी पड़ी हूँ कब से यहीं
कभी मान सखी मेरा भी कहना
मैं निखारूँगी तुम्हें, तुम मुझसे संवरना
कितनें सुन्दर सुन्दर रंग हैं मेरे
और कितनी अलग अलग है मेरी पहचान
चंदेरी , पटोला, कांजीवरम
लहरिया, तांत और लिनेन
ढाकाई, जामदानी, कलमकारी
पोचमपल्ली, बोमकाइ और फुलकारी
सम्भलपुरी, बनारसी और पैठानी
कासवु, बनारसी और बाँधनी
शिफॉन, जॉरजेट और चिकनकारी
बोमकाई , मूंगा और बालूचेरी
माना की जीन्स, सूट पहनना है आसान
पर मेरी भी कुछ अलग ही है शान
कजरा गजरा चूड़ी बाली बिंदिया
ये सब हैं मेरी ही सखियाँ
सब हँस हँस कर मेरे संग है आतीं
रूप तेरा दूना कर जातीं
जब मेरा लहराता है आँचल
रुक जाते हैं उड़ते बादल
सुनकर बातें ये साड़ी की
मैं बोली ऐसा ना बोल सखी री
पहनूँगी तुम्हें अभी आज से ही
तो आओ साड़ी को दे इक नई उड़ान
बनाये इसे आधुनिकता की पहचान
करें अपनी संस्कृति का सम्मान
साड़ी से बढ़ता है हर नारी का मान....
साड़ी से बढ़ता है हर नारी का मान....
साभार : अज्ञात
माता पिता से सीखे
पिता से संघर्ष सीखो ,
माता से संस्कार ।
बाकी सब कुछ दुनिया
तो सिखा ही देगी ।
थोड़ा और चले 👨🏻🦯
बस अगले मोड़
सुकून होगा... ||
चल जिंदगी..
थोड़ा और चले 👨🏻🦯
जी सोरो करा देवे
मारवाड़ी बोलने या समझने
गूंदपाक सियाले में,
दही-छाछ उँन्हाले में,
चीलड़ो बरसात में,
'डॉयफ्रूट' बारात में...
जी सोरो करा देवे
😊😊
स्वाद खीर को,
कोफ़्तो पनीर को,
रंग केसरफीणी को,
चूरमो देसी चीणी को...
जी सोरो करा देवे
😃😃
रोटी बाजरी की,
चटणी काचरी की,
बाटी भोभल की,
बड़ो मोठ-मोगर को...
जी सोरो करा देवे
😃😃
सबड़को राबड़ी को,
स्वाद गुलाबड़ी को,
साग केरसांगरी को,
मिठास गुड़ की डली को...
जी सोरो करा देवे
😃😃
खुपरी मतीरा की,
खुशबु सीरा की,
अचार गुंदा को,
भुजियो बीकानेर को...
जी सोरो करा देवे
😆😆
कचौरी दाल की,
जलेबी घाल की,
खीचड़ो बाजरी मोठ को,
मजो सावण की गोठ को...
जी सोरो करा देवे
😃😃
दूध घर की गाय को,
सुरडको गर्म चाय को,
राजभोग छेना को,
शर्बत केरी पोदीना को...
जी सोरो करा देवे
😆😆
मीठो पत्तो पान को,
खाणो राजस्थान को...
जी सोरो करा देवे
ये अजब गज़ब मुहावरे नहीं बुजुर्गों के अनुभवों की खान हैं
हिंदी का थोडा़ आनंद लीजिये...मुस्कुराइए...
ये अजब गज़ब मुहावरे नहीं बुजुर्गों के अनुभवों की खान हैं
हिंदी के मुहावरे, बड़े ही बावरे हैं,
खाने पीने की चीजों से भरे हैं...
कहीं पर फल हैं तो कहीं आटा-दालें है,
कहीं पर मिठाई है, कहीं पर मसाले हैं,
चलो, फलों से ही शुरू करते हैं,
एक एक कर सबके मजे लेते हैं...
यहां आम के आम और गुठलियों के भी दाम मिलते हैं, कभी अंगूर खट्टे हैं, तो कभी खरबूजे, खरबूजे को देख कर रंग बदलते हैं, कहीं दाल में काला है, तो कहीं किसी की दाल ही नहीं गलती है,
कोई डेढ़ चावल की खिचड़ी पकाता है,
तो कोई लोहे के चने चबाता है,
कोई घर बैठा रोटियां तोड़ता है,
कोई दाल भात में मूसरचंद बन जाता है,
गरीबी में जब आटा गीला होता है, तो आटे दाल का भाव मालूम पड़ जाता है,
सफलता के लिए कई पापड़ बेलने पड़ते हैं, आटे में नमक तो चल जाता है, पर गेंहूं के साथ, घुन भी पिस जाता है, अपना हाल तो बेहाल है, ये मुंह और मसूर की दाल है,
गुड़ खाते हैं और गुलगुले से परहेज करते हैं, और कभी गुड़ का गोबर कर बैठते हैं,
कभी तिल का ताड़, कभी राई का पहाड़ बनता है, कभी ऊँट के मुंह में जीरा है,
कभी कोई जले पर नमक छिड़कता है,
किसी के अभी दूध के दांत ही नही टूटे हैं, तो कई यहां पर दूध के धुले हैं,
कोई जामुन के रंग सी चमड़ी पा के रोई है, तो किसी की चमड़ी जैसे मैदे की लोई है, किसी को छठी का दूध याद आ जाता है, तो कहीं दूध का जला छाछ को भी फूंक फूंक पीता है, फिर तो बस.. दूध का दूध पानी का पानी हो जाता है,
शादी तो बूरे के वो लड्डू हैं, जो खाए वो भी पछताए, और जिसने नहीं खाए, वो भी पछताते हैं, पर शादी की बात सुन, सबके मन में लड्डू फूटते है, और शादी के बाद, किसी किसी के दोनों हाथों में लड्डू होते हैं,
कोई जलेबी की तरह सीधा है, कोई टेढ़ी खीर है, तो किसी के मुंह में घी शक्कर है, यहां सबकी अपनी अपनी तकदीर है.. कभी कोई चाय-पानी करवाता है, तो अपने मतलब के लिए कोई मक्खन लगाता है और जब छप्पर फाड़ कर कुछ मिलता है, तो सभी के मुंह में पानी आ जाता है,
भई अब कुछ भी हो, घी तो आखिर खिचड़ी में ही जाता है, जितने मुंह हैं, उतनी बातें हैं, मुफ्त की मलाई सभी खाना चाहते हैं सब अपनी-अपनी बीन बजाते हैं, पर नक्कारखाने में तूती की आवाज कौन सुनता है, सभी बहरे हैं, बावरें है ये सब हिंदी के मुहावरें हैं...
ज्ञान से ही मन शांत होगा
रन्गो भरी आज घुलेटी के सग थोडी मस्ती
होली मतलब रंगों का त्योहार। लाल ,हरा, पीला, नीला ओर अन्य कई रंग जिसके बिना होली का मजा नही है। लेकिन यह भी सच है कि यही रंग त्वचा और बालो के नुकशान का कारण बनते है। आज होली खेलने से पहले कुछ बातो का ध्यान रखे।
१ बालो मे नारियल आधारित हेयर ऑयल का इस्तेमाल करे। जिससे कि आपके बालो को नुकसान ना पहुचे।
२ आपके त्वचा के साथ सीधे सम्पर्क मे आने वाली जगहो पर मॉश्च्यूराइजर पैट्रोलियम जेली का एक पतला जेल लगाइए
३ मॉश्च्यूराइजर जेली ना हो तो नारियल तेल या सरसो का तेल अधिक मात्रा मे मल लिजिये।
४ अपने हाथ और पैर की उंगलियों के नाखूनो पर पेन्ट का पतला कोटिग चढाइए ताकि नाखून सुरक्षित रहे।
५ अपनी त्वचा की सुरक्षा के लिये पूरी लम्बाई का सलवार, समीज, कुर्ता या अन्य कपडा पहने।
६ अस्थमा पीडीत व्यक्ति के मुख पर गुलाल ना फैके ओर ना ही उडाए।
७ पक्के रासायन युक्त रन्गो से होली ना खेले ऐसे रन्गो को ऑखो से दुर रखे अनयथा हानी हो सकती है।
८ बजार पर ठेलो, हाथ गाडियो पर से गुलाल खरीदते समय यह निश्चय कर ले कि वो सन्थेटिक यामिट्टी युक्त गुलाल तो नही, अन्यथा बडी दुकान से असली गुलाल खरीदे।
9 किसी के साथ जबरदस्ती ना करे क्यो कि यह आपसी प्रेम सोहार्द एवम भाईचारे का त्योहार है
बुरा न मानो होली है यह बात ठीक है पर आप भी ध्यान रखे किसी का बुरा न हो क्यो कि होली भी बुराई पर अच्छाई कि जीत का पर्व है।
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पीएम के उम्मीदवार
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राहुल गान्धी
चापलूस काग्रेसियो ने दिखाया ख्वाब
सब कहते है, बन जाऐ पीएम राहुल साहब
भले मदर हो विदेशी
मगर है बेटा देशी
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शरद पवार
पीएम कि कुर्सी दिखे सपने मे हर रात
कोई घोडि चढवा दो
कोई दुल्हा बनवा दो।
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हमे जेल तक ले गया घोटाले का खेल
पीएम की कुर्सी तक जाए कोनसी रेल
कोई तिकडम भिड जाए
राबडी रबडी खाए।
लालकृष्ण आडवाणी
जिन्ना से श्री राम तक मेरे कितने रन्ग
पर मोदी और शेखावत करे रन्ग मे भन्ग
है इच्छा अन्तिम कायम
बनू एक बार मै पीएम।
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मनमोहनसिहजी
बाईपास के बाद दिल कहता है दिन रात
पास फैल का फैसला है मैया के हाथ
कि माता भाग जगा दे
कि फिर पीएम बना दे।
उदर आडवाणी का भगवा बी
लाल है और कृष्ण भी लाल है।
बीजेपी पुछ रएली है काग्रेस से,
बोले तो तुम्हारे पीएम का क्या
हाल है, तो लाल पे अम्मा निहाल है,
बोले तो आन्टी बोलने कू लगी,
"राहुल का सवाल है"
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आप सभी दोस्तों को आज रंगो का त्योहार धूलेटी पर हार्दिक मंगल एवं सुभकामानाई
बुरा न मानो होली हैताऊ-शास्त्रीजी-समीरलाला -फुरसतियाजी-भाटीयॉजी-सिमाजी गुप्ता- अल्पनाजी वर्मा

होली का हुडदन्ग मच गया
होलीआई,होलीआई
होली आई रे।
दुनियॉ रंग बिरंगी करने
सतरंगी अबीरगुलाल लाई रे।
इसी शोर ने घर घर मे
खुशियो कि रोनक करवाई रे।
कलियो मे योवन फुट पडा
पक्षियो ने मगल गान की
दुन्दुभी बजाई रे।
होली का हुडदन्ग........
रात्रिकाल मे होली दहन हुआ
नव अन्नो ने भुन सुगन्ध फैलाई रे।
रोटी पकाने को जिन्होने वर्ष भर
लकडीयॉ दर्शन न करा पाई रे।
उन्ही कि टुटी चारपाई
अग्नि के भेट चढाई रे।
कही रमारम कही ढमाढम
बेचारा ताऊ रो रो देता दुहाई रे ।
होली का हुडदन्ग,,,,,,,,,।
शास्त्रीजी,पिचकारी मारे रंग भरी
समीरलाला ने चेहरे पर कालिख पुतवाई रे।
मानसिक हलचल वाले ऐसे भी आऐ
फुरसतियाजी ने करी गले मिलाई रे।
ताऊ ताक मे घुम रहा था
उन्होने भाटीयॉजी को कैचफली लगाई रे।
सार दिन भाटीयॉजी पर मस्ती छाई
बारम्बार देह रहे खुजलाई रे।
होली का हुडदन्ग................।मोसम भी मनमोहक बन गया
सिमाजी गुप्ता लेने लगी अन्गडाई रे।
इसी पर्व ने हिरणकश्यप की क्रूरता
भक्त प्रहलाद कि कहानी अल्पनाजी वर्मा ने सुनाईरे।
व्यथा करुण भक्त कि सुन
व्यथित -योगेन्द्र मौदगिल ने भन्ग घुटवाई रे।
वैर भाव भुले चिठाजगत, ब्लोगवानी, नारद, सब इस दिन
आनन्दित जग करने मिलन बेला आई रे
होली का हुडदन्ग............।






बुरा न मानो होली है
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आप सभी को होली कि शुभकामनाऐ।



