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हम पानी क्यों ना पीये खाना खाने के बाद.!

Posted: 14 जून 2022 –


क्या कारण है.?

हमने दाल खाई,

हमने सब्जी खाई, 

हमने रोटी खाई,

हमने दही खाया,

लस्सी पी, दूध, दही, छाझ, लस्सी, फल आदि.!

ये सब कुछ भोजन के रूप मे हमने ग्रहण किया

ये सब कुछ हमको उर्जा देता है

और पेट उस उर्जा को आगे ट्रांसफर करता है.!

पेट मे एक छोटा सा स्थान होता है

जिसको हम हिंदी मे कहते है "अमाशय"

उसी स्थान का संस्कृत नाम है "जठर"

उसी स्थान को अंग्रेजी मे कहते है

"epigastrium"

ये एक थेली की तरह होता है

और यह जठर

हमारे शरीर मे सबसे

महत्वपूर्ण है

क्योंकि सारा खाना सबसे पहले इसी मे आता है।

ये बहुत छोटा सा स्थान हैं

इसमें अधिक से अधिक 350gms खाना आ सकता है.!

हम कुछ भी खाते

सब ये अमाशय मे आ जाता है.!


आमाशय मे अग्नि प्रदीप्त होती है


उसी को कहते हे "जठराग्न".!

ये जठराग्नि है

वो अमाशय मे प्रदीप्त होने वाली आग है ।

ऐसे ही पेट मे होता है

जेसे ही आपने खाना खाया

की जठराग्नि प्रदीप्त हो गयी..t

यह ऑटोमेटिक है,

जेसे ही अपने रोटी का पहला टुकड़ा मुँह मे डाला

की इधर जठराग्नि प्रदीप्त हो गई.!

ये अग्नि तब तक जलती हे जब तक खाना' पचता है |


अब अपने खाते ही

गटागट पानी पी लिया

और खूब ठंडा पानी पी लिया.r


और कई लोग तो बोतल पे बोतल पी जाते है.!


अब जो आग (जठराग्नि) जल रही थी

वो बुझ गयी.!

आग अगर बुझ गयी

.तो खाने की पचने की जो क्रिया है

वो रुक गयी.!

You suffer from IBS,

Never CURABLE


अब हमेशा याद रखें

खाना जाने पर

हमारे पेट में दो ही क्रिया होती है,

एक क्रिया है

जिसको हम कहते हे

"Digestion"

और दूसरी है "fermentation" फर्मेंटेशन का मतलब है

सडना...!

और

डायजेशन का मतलब हे

पचना.!


आयुर्वेद के हिसाब से आग जलेगी

तो खाना पचेगा,

खाना पचेगा

तो उससे रस बनेगा.!

जो रस बनेगा

तो उसी रस से

मांस, मज्जा, रक्त, वीर्य, हड्डिया, मल, मूत्र और अस्थि बनेगा

और सबसे अंत मे मेद बनेगा.!


ये तभी होगा

जब खाना पचेगा.!


यह सब हमें चाहिए.

ये तो हुई खाना पचने की बात.

अब जब खाना सड़ेगा तब क्या होगा..? 


खाने के सड़ने पर

सबसे पहला जहर जो बनता है

वो हे यूरिक एसिड (uric acid)


कई बार आप डॉक्टर के पास जाकर कहते है

की मुझे घुटने मे दर्द हो रहा है,

मुझे कंधे-कमर मे दर्द हो रहा है 


तो डॉक्टर कहेगा आपका यूरिक एसिड बढ़ रहा है

आप ये दवा खाओ,

वो दवा खाओ यूरिक एसिड कम करो|

और एक दूसरा उदाहरण खाना 


जब खाना सड़ता है,

तो यूरिक एसिड जेसा ही एक दूसरा विष बनता है

जिसको हम कहते हे

LDL (Low Density lipoprotive)

माने खराब कोलेस्ट्रोल (cholesterol)


जब आप

ब्लड प्रेशर(BP) चेक कराने

डॉक्टर के पास जाते हैं

तो वो आपको कहता है (HIGH BP)


हाई-बीपी है

आप पूछोगे...

कारण बताओ.?


तो वो कहेगा

कोलेस्ट्रोल बहुत ज्यादा बढ़ा हुआ है |


आप ज्यादा पूछोगे

की कोलेस्ट्रोल कौनसा बहुत है ?


तो वो आपको कहेगा

LDL बहुत है | 


इससे भी ज्यादा

खतरनाक एक  विष हे 

वो है.... VLDL

(Very Low Density Lipoprotive)


ये भी कोलेस्ट्रॉल जेसा ही विष है।

अगर VLDL बहुत बढ़ गया

तो आपको डॉक्टर भी नहीं बचा सकता|


खाना सड़ने पर

और जो जहर बनते है

उसमे एक ओर विष है

जिसको अंग्रेजी मे हम कहते है triglycerides.!


जब भी डॉक्टर

आपको कहे

की आपका "triglycerides" बढ़ा हुआ हे

तो समज लीजिए

की आपके शरीर मे

विष निर्माण हो रहा है |


तो कोई यूरिक एसिड के नाम से कहे,

कोई कोलेस्ट्रोल के नाम से कहे,

कोई LDL -VLDL के नाम से कहे

समझ लीजिए

की ये विष हे

और ऐसे विष 103 है |


ये सभी विष

तब बनते है

जब खाना सड़ता है |


मतलब समझ लीजिए

किसी का कोलेस्ट्रोल बढ़ा हुआ है

तो एक ही मिनिट मे ध्यान आना चाहिए

की खाना पच नहीं रहा है ,


कोई कहता हे

मेरा triglycerides बहुत बढ़ा हुआ है

तो एक ही मिनिट मे डायग्नोसिस कर लीजिए आप...!

की आपका खाना पच नहीं रहा है |


कोई कहता है

मेरा यूरिक एसिड बढ़ा हुआ है

तो एक ही मिनिट लगना चाहिए समझने मे

की खाना पच नहीं रहा है | 


क्योंकि खाना पचने पर

इनमे से कोई भी जहर नहीं बनता.!


खाना पचने पर

जो बनता है

वो है....

मांस, मज्जा, रक्त, वीर्य, हड्डिया, मल, मूत्र, अस्थि.! 


और


खाना नहीं पचने पर बनता है....

यूरिक एसिड,

कोलेस्ट्रोल,

LDL-VLDL.!


और यही

आपके शरीर को

रोगों का घर बनाते है.!


पेट मे बनने वाला यही जहर

जब ज्यादा बढ़कर खून मे आते है !

तो खून दिल की नाड़ियो मे से निकल नहीं पाता

और रोज थोड़ा थोड़ा कचरा

जो खून मे आया है

इकट्ठा होता रहता है

और एक दिन नाड़ी को ब्लॉक कर देता है

जिसे आप

heart attack कहते हैं.!


तो हमें जिंदगी मे ध्यान इस बात पर देना है

की जो हम खा रहे हे

वो शरीर मे ठीक से पचना चाहिए

और खाना ठीक से पचना चाहिए

इसके लिए पेट मे

ठीक से आग (जठराग्नि) प्रदीप्त होनी ही चाहिए|


क्योंकि

बिना आग के खाना पचता नहीं हे

और खाना पकता भी नहीं है 


महत्व की बात

खाने को खाना नहीं

खाने को पचाना है |


आपने क्या खाया कितना खाया

वो महत्व नहीं हे.!


खाना अच्छे से पचे

इसके लिए वाग्भट्ट जी ने सूत्र दिया.!


"भोजनान्ते विषं वारी"


(मतलब

खाना खाने के तुरंत बाद

पानी पीना

जहर पीने के बराबर है)


इसलिए खाने के

तुरंत बाद पानी

कभी मत पिये..!


अब आपके मन मे सवाल आएगा

कितनी देर तक नहीं पीना.?


तो 1 घंटे 48 मिनट तक नहीं पीना ! 


अब आप कहेंगे

इसका

क्या calculation हैं.?


बात ऐसी है....!


जब हम खाना खाते हैं

तो जठराग्नि द्वारा

सब एक दूसरे मे

मिक्स होता है

और फिर खाना पेस्ट मे बदलता हैं.!


पेस्ट मे बदलने की क्रिया होने तक

1 घंटा 48 मिनट का समय लगता है ! 


उसके बाद जठराग्नि कम हो जाती है.!


(बुझती तो नहीं लेकिन बहुत धीमी हो जाती है) 


पेस्ट बनने के बाद

शरीर मे रस बनने की

परिक्रिया शुरू होती है !


तब हमारे शरीर को

पानी की जरूरत होती हैं।


तब आप जितना इच्छा हो

उतना पानी पिये.!


जो बहुत मेहनती लोग है

(खेत मे हल चलाने वाले,

रिक्शा खीचने वाले,

पत्थर तोड़ने वाले)


उनको 1 घंटे के बाद ही

रस बनने लगता है

उनको  घंटे बाद

पानी पीना चाहिए ! 


अब आप कहेंगे

खाना खाने के पहले

कितने मिनट तक पानी पी सकते हैं.?


तो खाना खाने के

45 मिनट पहले तक

आप पानी पी सकते हैं ! 


अब आप पूछेंगे

ये मिनट का calculation....?


बात ऐसी ही

जब हम पानी पीते हैं

तो वो शरीर के प्रत्येक अंग तक जाता है !


और अगर बच जाये

तो 45 मिनट बाद मूत्र पिंड तक पहुंचता है.! 


तो पानी - पीने से मूत्र पिंड तक आने का समय 45 मिनट का है ! 


तो आप खाना खाने से

45 मिनट पहले ही

पाने पिये.!

डाक्टर नहीं बताता रोगी को पर आपके लिए जानना है आवश्यक

Posted: –

 वो बातें जो डाक्टर नहीं बताता रोगी को

 पर आपके लिए जानना है आवश्यक


1. दवाइयों से डायबिटीज बढ़ती है अक्सर डायबिटीज शरीर में इंसुलिन की कमी होने से पैदा होती है। लेकिन बहुत कम लोग यह जानते हैं कि कुछ खास दवाईयों के असर से भी शरीर में डायबिटीज होती है। इन दवाइयों में मुख्यतया एंटी डिप्रेसेंट्स, नींद की दवाईयां, कफ सिरफ तथा बच्चों को एडीएचडी (अतिसक्रियता) के लिए दी जाने वाली दवाईयां शामिल हैं। इन्हें दिए जाने से शरीर में इंसुलिन की कमी हो जाती है और व्यक्ति को मधुमेह का इलाज करवाना पड़ता है।

2. बिना वजह लगाई जाती है कुछ वैक्सीन वैक्सीन लोगों को किसी बीमारी से बचाव के लिए लगाई जाती है। परन्तु कुछ वैक्सीन्स ऎसी हैं जो या तो बेअसर हो चुकी है या फिर वायरस को फैलने में मदद करती है! इसलिए बेहतर होगा कि आप अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को उन्नत करने के लिए योग व (ayurveda) आयुर्वेद को अपने जीवन में अपनाये जो सभी बीमारियों से बचा सकते है! 

3. कैन्सर हमेशा कैन्सर ही नहीं होता यूं तो कैन्सर स्त्री-पुरूष दोनों में किसी को भी हो सकता है लेकिन ब्रेस्ट कैन्सर की पहचान करने में अधिकांशतया डॉक्टर गलती कर जाते हैं। सामान्यतया स्तन पर हुई किसी भी गांठ को कैंसर की पहचान मान कर उसका उपचार किया जाता है जो कि बहुत से मामलों में छोटी-मोटी फुंसी ही निकलती है। उदाहरण के तौर पर हॉलीवुड अभिनेत्री ए ंजेलिना जॉली ने मात्र इस संदेह पर अपने ब्रेस्ट ऑपरेशन करके हटवा दिए थे कि उनके शरीर में कैन्सर पैदा करने वाला जीन पाया गया था।

4. दवाईयां कैंसर पैदा करती हैं ब्लड प्रेशर या रक्तचाप (बीपी) की दवाईयों से कैन्सर होने का खतरा तीन गुना बढ़ जाता है। ऎसा इसलिए होता है क्योंकि ब्लडप्रेशर की दवाईयां शरीर में कैल्सियम चैनल ब्लॉकर्स की संख्या बढ़ा देता है जिससे शरीर में कोशिकाओं के मरने की दर बढ़ जाती है और प्रतिक्रियास्वरूप कोशिकाएं बेकार होकर कैंसर की गांठ बनाने में लग जाती हैं।

5. एस्पिरीन लेने से शरीर में इंटरनल ब्लीडिंग का खतरा बढ़ जाता है हॉर्ट अटैक तथा ब्लड क्लॉट बनने से रोकने के लिए दी जाने वाली दवाई एस्पिरीन से शरीर में इंटरनल ब्लीडिंग का खतरा लगभग 100 गुणा बढ़ जाता है। इससे शरीर के आ ंतरिक अंग कमजोर होकर उनमें रक्तस्त्राव शुरू हो जाता है। एक सर्वे में पाया गया कि एस्पिरीन डेली लेने वाले पेशेंट्स में से लगभग 10,000 लोगों को इंटरनल ब्लीडिंग का सामना करना पड़ा।

6. एक्स-रे से कैन्सर होता है आजकल हर छोटी-छोटी बात पर डॉक्टर एक्स-रे करवाने लग गए हैं। क्या आप जानते हैं कि एक्स-रे करवाने के दौरान निकली घातक रेडियोएक्टिव किरणें कैंसर पैदा करती हैं। एक मामूली एक्स-रे करवाने में शरीर को हुई हानि की भरपाई करने में कम से कम एक वर्ष का समय लगता है। ऎसे में यदि किसी को एक से अधिक बार एक्स-रे क रवाना पड़े तो सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। CT Scan केवल अति आवश्यक हो तब ही करवाएं ! 

7. सीने में जलन की दवाई आंतों का अल्सर साथ लाती है बहुत बार खान-पान या हवा-पानी में बदलाव होने से व्यक्ति को पेट की बीमारियां हो जाती है। इनमें से एक सीने में जलन का होना भी है जिसके लिए डॉक्टर एंटी-गैस्ट्रिक दवाईयां देते हैं। इन मेडिसीन्स से आंतों का अल्सर होने की संभावना बढ़ जाती है, साथ ही साथ हडि्डयों का क्षरण होना, शरीर में विटामिन बी12 को एब्जॉर्ब करने की क्षमता कम होना आदि बीमारियां व्यक्ति को घेर लेती हैं। सबसे दुखद बात तब होती है जब इनमें से कुछ दवाईयां बीमारी को दूर तो नहीं करती परन्तु साईड इफेक्ट अवश्य लाती हैं।

8. दवाईयों और लैब-टेस्ट से डॉक्टर्स कमाते हैं मोटा कमीशन यह अब छिपी बात नहीं रही कि डॉक्टरों की कमाई का एक मोटा हिस्सा दवाईयों के कमीशन से आता है। यहीं नहीं डॉक्टर किसी खास लेबोरेटरी में ही मेडिकल चैकअप के लिए भेजते हैं जिसमें भी उन्हें अच्छी खासी कमाई होती है। कमीशनखोरी की इस आदत के चलते डॉक्टर अक्सर जरूरत से ज्यादा मेडिसिन दे देते हैं।

9. जुकाम सही करने के लिए कोई दवाई नहीं है नाक की अंदरूनी त्वचा में सूजन आ जाने से जुकाम होता है। अभी तक मेडिकल साइंस इस बात का कोई कारण नहीं ढूंढ पाया है कि ऎसा क्यों होता है और ना ही इसका कोई कारगर इलाज ढूंढा जा सका है। डॉक्टर जुकाम होने पर एंटीबॉयोटिक्स लेने की सलाह देते हैं परन्तु कई अध्ययनों में यह साबित हो चुका है कि जुकाम 4 से 7 दिनों में अपने आप ही सही हो जाता है। जुकाम पर आपके दवाई लेने का कोई असर नहीं होता है, हां आपके शरीर को एंटीबॉयोटिक्स के साईड-इफेक्टस जरूर झेलने पड़ते हैं। जबकि आयुर्वेद में इसे कफ दोष के कारण ही माना जाता है!

 10. एंटीबॉयोटिक्स से लिवर को नुकसान होता है मेडिकल साइंस की सबसे अद्भुत खोज के रूप में सराही गई दवाएं एंटीबॉयोटिक्स हैं। एंटीबॉयोटिक्स  ने व्यक्ति की औसत उम्र बढ़ा दी है और स्वास्थ्य लाभ में अनूठा योगदान दिया है, लेकिन तस्वीर के दूसरे पक्ष के रूप में एंटीबॉयोटिक्स व्यक्ति के लीवर को डेमेज करती है। यदि लंबे समय तक एंटीबॉयोटिक्स का प्रयोग कि या जाए तो व्यक्ति की किडनी तथा लीवर बुरी तरह से प्रभावित होते हैं! 

11. अनेक डाक्टर खुद योग और देसी दवाओं से अपना और अपने परिवार का इलाज करवाते हैं क्योंकि उन्हें पता है कि आयुर्वेद और योग के साइड इफ़ेक्ट नही हैं और इससे रोग भी जड़ से समाप्त होते हैं.

12. बाइपास सर्जरी जो कि हृदयघात (दिल का दौरा) के रोगियों के लिए बताई जाती है वो डाक्टर खुद अपने लिए कभी नही सोचते क्योंकि एक तो यह स्थाई इलाज नही है दूसरा इस से दौरा फिर से पड़ने के मौके कम नही होते, खुद पर ऐसी समस्या आने पर डाक्टर घिया (लौकी) का रस या अर्जुन की छाल का काढ़ा बना कर पीते हैं या रोज प्राणायाम और योग करते हैं.

उनकी तो धंधे की मजबूरी है पर आप तो बता सकते हैं ये राज़ .......


सावधानी - यह  लेख सोसियल  मीडिया  के  सभार  से  लिया गया / सिर्फ अच्छी  जानकारी  हेतु / उपयोग करते समय जांस  परख  के बाद  ही उपयोग  करे  / इसमें हमारी  कोई  जवाब देही  नहीं  रहेगी - ब्लोगकर्ता

सेंधा नमक,

Posted: 13 जून 2022 –

 सेंधा नमक, 

शुद्धतम शुद्ध..

जानिये इसके 20 अद्भुत गुण और केमिकलयुक्त समुद्री नमक को तिलांजलि दें अन्यथा डॉक्टरों के चक्कर लगाने से फुर्सत नहीं मिलेगी और हम सब मकड़जाल में फंसते जायेंगे।

"सेंधा नमक" को सबसे "शुद्ध नमक" माना जाता है, क्योंकि इसमें मिलावट और रसायन नहीं होते हैं।

बहुत कम लोग जानते हैं कि यह नमक सिर्फ एक मसाला नहीं है बल्कि इसमें सारे तत्व शामिल है जो एक शरीर की जरुरत होते हैं....

जैसे की लोहा, कैल्शियम, पोटेशियम, जिन्क और भी बहुत कुछ सेंधा नमक में मौजूद होता हैं।


इसे आप खाने में मिलाकर खा सकते हैं या फिर बाजार में सप्लीमेंट्स, पाउडर और पिल्स मौजूद होती है जिसे आप ले सकते है।

लेकिन आप इसे बिना डॉक्टर के सुझाव के लें, तो फिर बिना देरी किए आइए सेंधा नमक के सेहत से जुड़े फायदो के बारे में जानते हैं। जिनके बारे में शायद ही आप जानते होंगे...


(1). सेंधा नमक खराब पाचन के उपचार में काफी प्रभावी होता है। ये एक औषधि की तरह काम करता है जिससे पाचन में सुधार आता है। ये आपके भूख और गैस में भी राहत देता हैं।


(2). रोजाना सेंधा नमक खाने से आपके शरीर के खोए हुए इलेक्ट्रोलाइट्स को फिर से भरता है और पीएच स्तर को नियंत्रित रखता है। ये रक्त परिसंचरण को उत्तेजित करता है और शरीर में मौजूदा गंदगी और टॉक्सिक मिनरल्स को बहार निकाल देता है।


(3). ये आपके रक्तचाप के स्तर का संतुलन बनाए रखता है।


(4). सेंधा नमक कई दाद और कीड़े के काटे हुए और गाठिया के दर्द से रोगों के उपचारो से निजात दिलाता है। ये हर भारतीय घरों में पाया जाता हैं।


(5). आप शायद इस तथ्य को जानकर चौंक जाएं कि सेंधा नमक वजन कम करने में मदद करता हैं। ये शरीर के फैट सेल्स को कम कर देता है।


(6). जब सेंधा नमक नींबू के रस के साथ लिया जाता है तो पेट के कीड़ो से आराम मिलता है और उल्टियों को भी रोकता है।


(7). महंगे सी-सॉल्ट बाथ खरीदने की बजाय आप बिना रुपये खर्च किए खुद भी बना सकते है अपना सी सॉल्ट बाथ, इसे बनाने के लिए अपने नहाने वाले पानी में एक चम्मच सेंधा नमक मिला लें और फिर उस पानी को नहाने के लिए इस्तेमाल करे। इस पानी से नहाने से आपको राहत मिलेगा, ये गले की मांसपेशियों को शांत करता है, आपके शरीर को डिटॉक्सीफाय करता है। इसके साथ ही आपके रक्त चाप को नियंत्रित रखता है।


(8). अगर अक्सर आपके मांसपेंशियों में ऐंठन होती है तो सेंधा नमक आपको राहत पहुंचा सकता है। इसके लिए एक गिलास पानी में थोड़ा सा सेंधा नमक मिला कर पिएं।


(9). जो लोग साइनस और सांस की समस्या से पीड़ित है उन्हें रोजाना सेंधा नमक का सेवन करना चाहिए। सेंधा नमक से गार्गिल करने से गले में सूजन, दर्द, सूखी खांसी और टॉन्सिल से राहत मिलती है। जो लोग ब्रोंकाइटिस, दमा या सांस की अन्य समस्याओं के शिकार है वो सेंधा नमक की भाप ले सकते हैं।


(10). सेंधा नमक जरुरी मिनर्लस प्रदान करता है और आपके इम्यून सिस्टम को सुधारता हैं। इसके अलावा ये संचार, श्वसन और तंत्रिका तंत्र को एक हद तक सुधारता है।


(11). सेंधा नमक आपके दातों को सफेद करता और मुंह के फ्रेशनर के तौर पर इस्तेमाल होता है। आप खराश के लिए इस नमक से गार्गल भी कर सकते है।


(12). सेंधा नमक प्रभावी ढंग से पाचन और लार के रस को स्वस्थ बनाए रखता है। आप सामान्य नमक की बजाय अपने खाने में सेंधा नमक का इस्तेमाल कर सकते है।


(13). नमक को और प्रभावी बनाने के लिए आप तांबे के बर्तन में स्टोर कर सकते है जब तक वो लाल ना हो जाए।


(14). सेंधा नमक हड्डियों और टिश्यूज़ को मजबूत बनाता है


(15). सेंधा नमक को खूबसूरती बढ़ाने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। इसके इस्तेमाल से आपके शरीर की मृत त्वचा से छुटकारा मिलता है।


(16). आप अपने शरीर को पोषण पहुंचाने के लिए भी सेंधा नमक का इस्तेमाल कर सकतो हो


(17). चेहरे को साफ करने के अलावा सेंधा नमक आपके त्वचा के टीशूज को मजबूत बनाता है और आपको जवां दिखाने में मदद करता है।


(18). सेंधा नमक को आप पैरों के स्क्रब के तौर पर भी इस्तेमाल कर सकते है। इसके लिए बस आपको आधी बाल्टी गुनगुने पानी में 2 चम्मच सेंधा नमक मिलाना है और उसमें अपने पैरों को ड़ाल दें। इस पानी में अपना पसंदीदा कोई सा भी तेल ड़ाल सकते हैं।


(19). इसके अलावा आप अपने क्लींनजर की जगह सेंधा नमक का इस्तेमाल कर सकते है जिसमें क्लीनजर के गुण समाए हुए है। सेंधा नमक जमी गंदगी और अतिरिक्त तेल बहार निकाल देते है। क्लींनजर बनाने के लिए आप अपने क्लींनजर में सेंधा नमक को मिला लें और साफ करने के बाद अपने चेहरे को धो लें।


(20). अगर आपके नाखून पीले पड़ गए हैं या फिर उसके रंग में बदलाव आ गया है तो आप सेंधा नमक की मदद से अपने खोए हुए रंग को पा सकते है। इससे आपके नाखूनों की खोई हुई चमक भी वापस आ जाएगी।


सावधानी - यह  लेख सोसियल  मीडिया  के  सभार  से  लिया गया / सिर्फ अच्छी  जानकारी  हेतु / उपयोग करते समय जांस  परख  के बाद  ही उपयोग  करे  / इसमें हमारी  कोई  जवाब देही  नहीं  रहेगी - ब्लोगकर्ता