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तू राजा, मै महाराजा

Posted: 07 अक्टूबर 2009
तू राजा, मै महाराजा

गली संकरी है. कोई राजा उससे निकल रहा हो ओर अचानक सामने से दोड़ता हुआ सांड आ जाए... तो अब राजा क्या करेगा ? क्या यह कहेगा कि ऐ सांड ! 
तू हट जा ..... 
यह मेरी गली है.... 
मै यंहा का राजा हू.... 
तो सांड कहेगा-
"तू राजा, मै महाराजा, आ... जा.....

राजा कि समझदारी इसी में है कि या तो वह चबूतरे पर या खंभे पर चढ़ जाएगा. या पीछे हट जाएगा. दिन भर में हमें कई सांड मिलते है, पर हमें किसी से टकराना नहीं है क्यों कि टकराव बिखराव का कारण है.
मुनिश्री तरुण सागर जी कड़वे प्रवचन 1-4

सत्य ओर झुट में कितना फर्क है ?

Posted: 04 अक्टूबर 2009
कबीर से किसी ने पूछा-सत्य ओर झुट में कितना फर्क है ? 
कबीर ने कहा- चार इंच .
शिष्य ने पूछा - वो कैसे ? 
कबीर ने समझाया -आँख ओर कान में चार इंच का ही फर्क है. जो कान में सनाई पड़े वह झूठ ओर जो आँख से दिखाई पड़े वह सच. हमारी जिन्दगी कानो से चल रही है, किसी के विषय में जो कुछ भी सुनते है, उसे परम सत्य मान बैठते है, जबकि भगवान ने हमें दो आँखे भी दी है, यह देखने के लिए की सुना हुआ सच है या नहीं .
 मुनिश्री तरुण सागरजी कड़वे प्रवसन  83-4

24 ऑवर्स फ्री सर्विस

Posted: 28 सितंबर 2009
24 ऑवर्स फ्री सर्विस

जिन्दा  रहने के लिए हवा सबसे बढिया दवा है। आदमी को आठ दिनो तक भोजन न मिले तो जिन्दा रह सकता है। चार दिन पानी ना मिले तो जिन्दा रह सकता है। लेकिन दो मिनट हवा न मिले तो जिन्दा नही रह सकता है। हवा धर्मनिरपेक्ष है। हिन्दू हो या मुसलमान, जैन हो या बोद्ध हवा सबको स्वीकार है। हवा भेद भाव भी नही करती है। गरीब के पास कोई नही जाता किन्तु हवा जाती है। यह कुदरत की और से मनुष्य के लिऍ 24 ऑवर्स फ्री सर्विस है। मनुष्य को अगर हवा न मिले तो मनुष्य की हवा निकलते देर नही लगेगी। पैड पोधो की अन्धा-धुन कटाई को रोक, हमे पर्यावरण को बचाना है।
मुनि श्री तरुणसागरजी कडवे प्रवचन,75-4

आई. टी. और ब्यूटी

Posted: 27 सितंबर 2009
आई. टी. और ब्यूटी
दो चीजो मे हम और हमारा देश बहुत आगे है- आई. टी. और ब्यूटी.
बूढे से बूढे आदमी को लेटेस्ट से लेटेस्ट फ़ैशन चाहिए. 
सत्य-शिव-सुन्दर  मे से सत्य और शिव गायब हो गया . 
अब केवल सुन्दर बाकी बचा है. जिसकी लोगो को चिन्ता है. 
मै आई. टी. और ब्यूटी के खिलाफ़ नही हू. 
मै तो सिर्फ़ इतना चाहता हू कि हम हमारा देश आई.टी. और ब्यूटी के साथ अपनी ड्यूटी मे भी आगे आए.
मुनि श्री तरुणसागरजी, कड्वे प्रवचन 4-20


बुराई पर अच्छाई की
विजय का प्रतिक,
दहशहरे पर शुभकामनाऎ,


"प्लीज यूज मी"

Posted: 21 सितंबर 2009
"प्लीज यूज मी"
निंदा में बड़ा रस है. यदि हमारे घर के सामने कोई  कचरा डाल जाए तो हम उससे झगडा करने को तैयार हो  जाते है. लेकिन जब कोई व्यक्ती हमारे कानो में किसी अन्य व्यक्ति की निंदा स्वरूप निंदा का कचरा भरता है तो हम बड़े खुस होकर उसकी बातो को सुनते है . अगर निंदा ही सुननी है तो फिर यो करे - अपने कान पर ऊपर  लिखे "" डस्टबिन"" और नीचे "प्लीज यूज मी".
निंदा करना, सुनना दोनों ही पाप है. 
निंदा, निंद्रा से जितना दूर रहे उतना ही अच्छा है. 
मुनि श्री तरुण सागर जी कड़वे प्रवचन, 4 - 111

सबसे बड़े तो अटलजी है.

Posted: 20 सितंबर 2009
सबसे बड़े तो अटलजी है. 

हिमालय पर हनुमान, रामचन्द्र जी, अटलजी बैठे थे. 
चर्चा चली की सबसे बड़ा कोन ?.
हनुमान ने कहा -" हिमालय सबसे बड़ा है-
यह जगजाहिर है." 
हिमालय ने कहा -"एक बार हनुमान ने मुझे हाथो पर उठा लिया था इसलिए हनुमान बड़े है." 
हनुमान ने कहा -" यह सब तो रामजी की कृपा से हुआ था. इसका मतलब रामचंद्राजी सबसे बड़े  हुए ." 
रामजी ने कहा-" भैया! सबसे बड़े तो ये अटलजी है." 
अटलजी ने कहा -"कैसे ?" 
रामजी ने कहा - "ये जब चाहे मुझे अपने "एजेंडे" में रख लेते है ओर जब चाहे निकाल देते है ." 
मुनि श्री तरुण सागर जी " कड़वे प्रवचन, 4- 4

कोई मुझे रामसुर्य नही कहेगा।

Posted: 19 सितंबर 2009
रामजी का जन्म हुआ तो सब खुश हुए। 
किन्तु चन्द्र्मा रोने लगा। 
रामजी ने पुछा-"तुम क्यो रोते हो ?" 
चन्द्रमा ने कहा-"आप सूर्यवन्श मे पैदा हुऐ इसलिए सूर्य खुश है। मुझे तो आपके दर्शन होगे नही, 
फिर मेरा उद्धार कैसे होगा ?" 
रामजी को दया आ गई। उन्होने कहा-"मेरा जन्म भले ही सूर्यवन्श मे हुआ है, पर कोई मुझे "रामसुर्य" नही कहेगा। मै आज से तुम्हारा नाम धारण करता हू। लोग मुझे "रामचन्द्र" ही कहेगे।"
महापुरुष बडे दयाशील होते है ।उनकी दया के लिए यह जरुरी है कि हम उन्हे दिल से याद करे।
मुनि श्री तरुणसागरजी, कडवे प्रवचन- 4-94