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डाक्टर नहीं बताता रोगी को पर आपके लिए जानना है आवश्यक

Posted: 14 जून 2022

 वो बातें जो डाक्टर नहीं बताता रोगी को

 पर आपके लिए जानना है आवश्यक


1. दवाइयों से डायबिटीज बढ़ती है अक्सर डायबिटीज शरीर में इंसुलिन की कमी होने से पैदा होती है। लेकिन बहुत कम लोग यह जानते हैं कि कुछ खास दवाईयों के असर से भी शरीर में डायबिटीज होती है। इन दवाइयों में मुख्यतया एंटी डिप्रेसेंट्स, नींद की दवाईयां, कफ सिरफ तथा बच्चों को एडीएचडी (अतिसक्रियता) के लिए दी जाने वाली दवाईयां शामिल हैं। इन्हें दिए जाने से शरीर में इंसुलिन की कमी हो जाती है और व्यक्ति को मधुमेह का इलाज करवाना पड़ता है।

2. बिना वजह लगाई जाती है कुछ वैक्सीन वैक्सीन लोगों को किसी बीमारी से बचाव के लिए लगाई जाती है। परन्तु कुछ वैक्सीन्स ऎसी हैं जो या तो बेअसर हो चुकी है या फिर वायरस को फैलने में मदद करती है! इसलिए बेहतर होगा कि आप अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को उन्नत करने के लिए योग व (ayurveda) आयुर्वेद को अपने जीवन में अपनाये जो सभी बीमारियों से बचा सकते है! 

3. कैन्सर हमेशा कैन्सर ही नहीं होता यूं तो कैन्सर स्त्री-पुरूष दोनों में किसी को भी हो सकता है लेकिन ब्रेस्ट कैन्सर की पहचान करने में अधिकांशतया डॉक्टर गलती कर जाते हैं। सामान्यतया स्तन पर हुई किसी भी गांठ को कैंसर की पहचान मान कर उसका उपचार किया जाता है जो कि बहुत से मामलों में छोटी-मोटी फुंसी ही निकलती है। उदाहरण के तौर पर हॉलीवुड अभिनेत्री ए ंजेलिना जॉली ने मात्र इस संदेह पर अपने ब्रेस्ट ऑपरेशन करके हटवा दिए थे कि उनके शरीर में कैन्सर पैदा करने वाला जीन पाया गया था।

4. दवाईयां कैंसर पैदा करती हैं ब्लड प्रेशर या रक्तचाप (बीपी) की दवाईयों से कैन्सर होने का खतरा तीन गुना बढ़ जाता है। ऎसा इसलिए होता है क्योंकि ब्लडप्रेशर की दवाईयां शरीर में कैल्सियम चैनल ब्लॉकर्स की संख्या बढ़ा देता है जिससे शरीर में कोशिकाओं के मरने की दर बढ़ जाती है और प्रतिक्रियास्वरूप कोशिकाएं बेकार होकर कैंसर की गांठ बनाने में लग जाती हैं।

5. एस्पिरीन लेने से शरीर में इंटरनल ब्लीडिंग का खतरा बढ़ जाता है हॉर्ट अटैक तथा ब्लड क्लॉट बनने से रोकने के लिए दी जाने वाली दवाई एस्पिरीन से शरीर में इंटरनल ब्लीडिंग का खतरा लगभग 100 गुणा बढ़ जाता है। इससे शरीर के आ ंतरिक अंग कमजोर होकर उनमें रक्तस्त्राव शुरू हो जाता है। एक सर्वे में पाया गया कि एस्पिरीन डेली लेने वाले पेशेंट्स में से लगभग 10,000 लोगों को इंटरनल ब्लीडिंग का सामना करना पड़ा।

6. एक्स-रे से कैन्सर होता है आजकल हर छोटी-छोटी बात पर डॉक्टर एक्स-रे करवाने लग गए हैं। क्या आप जानते हैं कि एक्स-रे करवाने के दौरान निकली घातक रेडियोएक्टिव किरणें कैंसर पैदा करती हैं। एक मामूली एक्स-रे करवाने में शरीर को हुई हानि की भरपाई करने में कम से कम एक वर्ष का समय लगता है। ऎसे में यदि किसी को एक से अधिक बार एक्स-रे क रवाना पड़े तो सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। CT Scan केवल अति आवश्यक हो तब ही करवाएं ! 

7. सीने में जलन की दवाई आंतों का अल्सर साथ लाती है बहुत बार खान-पान या हवा-पानी में बदलाव होने से व्यक्ति को पेट की बीमारियां हो जाती है। इनमें से एक सीने में जलन का होना भी है जिसके लिए डॉक्टर एंटी-गैस्ट्रिक दवाईयां देते हैं। इन मेडिसीन्स से आंतों का अल्सर होने की संभावना बढ़ जाती है, साथ ही साथ हडि्डयों का क्षरण होना, शरीर में विटामिन बी12 को एब्जॉर्ब करने की क्षमता कम होना आदि बीमारियां व्यक्ति को घेर लेती हैं। सबसे दुखद बात तब होती है जब इनमें से कुछ दवाईयां बीमारी को दूर तो नहीं करती परन्तु साईड इफेक्ट अवश्य लाती हैं।

8. दवाईयों और लैब-टेस्ट से डॉक्टर्स कमाते हैं मोटा कमीशन यह अब छिपी बात नहीं रही कि डॉक्टरों की कमाई का एक मोटा हिस्सा दवाईयों के कमीशन से आता है। यहीं नहीं डॉक्टर किसी खास लेबोरेटरी में ही मेडिकल चैकअप के लिए भेजते हैं जिसमें भी उन्हें अच्छी खासी कमाई होती है। कमीशनखोरी की इस आदत के चलते डॉक्टर अक्सर जरूरत से ज्यादा मेडिसिन दे देते हैं।

9. जुकाम सही करने के लिए कोई दवाई नहीं है नाक की अंदरूनी त्वचा में सूजन आ जाने से जुकाम होता है। अभी तक मेडिकल साइंस इस बात का कोई कारण नहीं ढूंढ पाया है कि ऎसा क्यों होता है और ना ही इसका कोई कारगर इलाज ढूंढा जा सका है। डॉक्टर जुकाम होने पर एंटीबॉयोटिक्स लेने की सलाह देते हैं परन्तु कई अध्ययनों में यह साबित हो चुका है कि जुकाम 4 से 7 दिनों में अपने आप ही सही हो जाता है। जुकाम पर आपके दवाई लेने का कोई असर नहीं होता है, हां आपके शरीर को एंटीबॉयोटिक्स के साईड-इफेक्टस जरूर झेलने पड़ते हैं। जबकि आयुर्वेद में इसे कफ दोष के कारण ही माना जाता है!

 10. एंटीबॉयोटिक्स से लिवर को नुकसान होता है मेडिकल साइंस की सबसे अद्भुत खोज के रूप में सराही गई दवाएं एंटीबॉयोटिक्स हैं। एंटीबॉयोटिक्स  ने व्यक्ति की औसत उम्र बढ़ा दी है और स्वास्थ्य लाभ में अनूठा योगदान दिया है, लेकिन तस्वीर के दूसरे पक्ष के रूप में एंटीबॉयोटिक्स व्यक्ति के लीवर को डेमेज करती है। यदि लंबे समय तक एंटीबॉयोटिक्स का प्रयोग कि या जाए तो व्यक्ति की किडनी तथा लीवर बुरी तरह से प्रभावित होते हैं! 

11. अनेक डाक्टर खुद योग और देसी दवाओं से अपना और अपने परिवार का इलाज करवाते हैं क्योंकि उन्हें पता है कि आयुर्वेद और योग के साइड इफ़ेक्ट नही हैं और इससे रोग भी जड़ से समाप्त होते हैं.

12. बाइपास सर्जरी जो कि हृदयघात (दिल का दौरा) के रोगियों के लिए बताई जाती है वो डाक्टर खुद अपने लिए कभी नही सोचते क्योंकि एक तो यह स्थाई इलाज नही है दूसरा इस से दौरा फिर से पड़ने के मौके कम नही होते, खुद पर ऐसी समस्या आने पर डाक्टर घिया (लौकी) का रस या अर्जुन की छाल का काढ़ा बना कर पीते हैं या रोज प्राणायाम और योग करते हैं.

उनकी तो धंधे की मजबूरी है पर आप तो बता सकते हैं ये राज़ .......


सावधानी - यह  लेख सोसियल  मीडिया  के  सभार  से  लिया गया / सिर्फ अच्छी  जानकारी  हेतु / उपयोग करते समय जांस  परख  के बाद  ही उपयोग  करे  / इसमें हमारी  कोई  जवाब देही  नहीं  रहेगी - ब्लोगकर्ता

सीने में दर्द- EECP थेरेपी

Posted: 13 जून 2022

  हाल ही में, सीने में दर्द के कारण एक व्यक्ति को पुणे के एक जाने-माने नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया था।  2016 में उन्हें पहले अटेक हुआ था और उनका इलाज चल रहा था।  डॉक्टरों ने अब एंजियोग्राफी का सुझाव दिया है।

  

 मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल में एंजियोग्राफी के दौर से गुजरने पर डॉक्टरों ने कई ब्लॉकेज का पता लगाया, जिसके लिए एंजियोप्लास्टी को खारिज कर दिया गया और इसके बजाय, 'बाईपास सर्जरी' का सुझाव दिया गया।


 उस शाम, उन्हें घर लाया गया क्योंकि डॉक्टर ने उनके दिल को बहुत कमजोर होने का सुझाव दिया, बाईपास केवल 10 - 15 दिनों के बाद ही उच्च जोखिम के साथ किया जा सकता था।

  

 इस बीच, रिश्तेदारों और करीबी दोस्तों के साथ इस मामले पर चर्चा करने के बाद, एक पारिवारिक मित्र से ताजा जानकारी मिली।

  

 EECP थेरेपी के रूप में जाना जाने वाला एक नया उपचार BY Indian Medical AIIMS DOCTOR के द्वारा पेश किया गया है।

 अब इसका अनुमोदन US FDA और T.N GOV ने किया है


 यहाँ हार्ट ब्लॉकेज बिना बाईपास सर्जरी के और बिना स्टेंट के इलाज करेंगे, इस एडवांस्ड  "EECP Mechine" के साथ.

  

 इस थेरेपी के साथ, एक रोगी जिसे बाईपास से गुजरना पड़ता है, उसे ऐसा करने की आवश्यकता नहीं है

 (इसे नैचुरल बायपास कहा जाता है)


 इसके बजाय, रोगी को IV तरल पदार्थों की लगभग 20 बोतलें दी जाती हैं, जिसमें कुछ दवाएँ इंजेक्ट की जाती हैं।  दवा प्रणाली को साफ करती है और हृदय और धमनियों से सभी रुकावटों को दूर करती है।  दी गई बोतलों की संख्या रोगी की आयु-कारक और स्वास्थ्य के आधार पर बढ़ सकती है।

 प्रति बोतल लागत 2000 / - रुपये के आसपास हो सकती है।


 वर्तमान में, भारत में कुछ डॉक्टर इस क्षेत्र में विशेषज्ञ हैं

भोपाल में 

Dr.Leena Sambhalkar

Mob No

9977310314

इस पद्धती से सफल इलाज करती हैं ।


पुणे मे DR.VIKARAM RATHOD यह इलाज करते हैं

 मोब:   09500037040

         07200648296

         04443192129


सावधानी - यह  लेख सोसियल  मीडिया  के  सभार  से  लिया गया / सिर्फ अच्छी  जानकारी  हेतु / उपयोग करते समय जांस  परख  के बाद  ही उपयोग  करे  / इसमें हमारी  कोई  जवाब देही  नहीं  रहेगी - ब्लोगकर्ता