जीवन विज्ञान विद्यार्थीयों में व्यवहारिक एवं अभिवृति परिवर्तन सूनिशचित करता है

Posted: 04 दिसंबर 2009
जीवन विज्ञान

  


  (आचार्यश्री महाप्रज्ञजी, युवाचार्यश्री महाश्रमनजी, साध्वी प्रमुखाजी, राष्ट्रपति के संग शिक्षा पद्धति पर बात करते हुए) 



आचार्य महाप्रज्ञ ने हमेशk देश की शिक्षा पद्धति को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। उनका मानना है कि शिक्षा का मूल उद्धेश्य है व्यक्ति का सर्वांगीण विकास तथा नैतिक मूल्यों की प्रतिष्ठा एवं सच्चरित्रवान्‌ मनुष्य का निर्माण। उन्होंने जीवन-विज्ञान के अंतर्गत विस्तृत पाठयक्रम प्रदान किया है। जीवन विज्ञान विद्यार्थीयों में व्यवहारिक एवं अभिवृति परिवर्तन सूनिशचित करता है।
     

आचार्य महाप्रज्ञ द्वारा विद्यार्थियों के लिए जो शैक्षणिक पाठयक्रम एवं प्रयोग संसूचित किए गये हैं वे उसके जीवन में ऐसे महत्पूर्ण जैव-रासायनिक एवं विद्युतीय परिर्वतन करते हैं जिससे उनका संपूर्ण रूप से रूपांतरण हो सके। आचार्य महाप्रज्ञ विश॓ष बल देकर कहते है कि एक विद्यार्थी को विविध आसनों एवं प्रयोगों का अनुगमन करना चाहिए। मूल्य परक जीवन जीने के लिए व्यक्ति को अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण करना चाहिए
     

वो कहते हैं सिर्फ उच्च शिक्षा से प्राप्त बौद्धिक विकास के साथ एक व्यक्ति नैतिक भावनात्मक एवं आध्यात्मिक स्तर पर स्वतः विकास नहीं करता। व्यक्ति में सही भावात्मक विकास आवश्यक है जिससे प्रेम, करूणा, सहिष्णुता, धैर्य, संतोष आदि गुण उसमें विकसित हो। इस संदर्भ में आचार्य महाप्रज्ञ ने वैशविक समस्याओं के समाधान हेतु जीवन विज्ञान का उपक्रम प्रस्तुत किया।
     
आचार्य महाप्रज्ञ द्वारा निर्मित एवं विकसित जीवन विज्ञान राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, बिहार, आदि राज्यों में विद्यार्थियों के लिए पाठयक्रम के रूप में शामिल किया गया है।
     
जीवन विज्ञान का मुख्य उद्धेश्य तीन प्रकार का है (१) ऐसे स्वस्थ व्यक्तित्व का निर्माण करना जो शरीरिक, मानसिक, भावात्मक एवं सामाजिक स्वस्थता के मध्य सामंजस्य स्थापित कर सके। (२) एक ऐसे नये समाज का निर्माण करना जो हिंसक उपद्रवों एवं अनैतिकता से मुक्त हो। (३) ऐसी नई पीढी का निर्माण करना जो आध्यात्मिक-वैज्ञानिक व्यक्तित्व हो।
     
औपचारिक शिक्षा पाठसक्रमों में इस पाठयक्रम को सम्मिलित किया गया है। सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास के लिए इस पाठयक्रम के माध्यम से प्रशिक्षित करने हेतु सैकडों विर आयोजित हो चुके है ।


terapanthinfo terapanth Philosophy JeevanVigyan

3 comments:

  1. MUMBAI TIGER मुम्बई टाईगर 05 दिसंबर, 2009
  2. राज भाटिय़ा 05 दिसंबर, 2009

    बहुत सुंदर लेख ओर अति सुंदर चित्र

  3. Gyan Dutt Pandey 05 दिसंबर, 2009

    आप तो जरा विस्तार बतायें इस शैक्षणिक कार्यक्रम का। इसके तत्व विस्तार से पता चलें।
    यह जरूर है कि एक स्वस्थ शारीरिक, नैतिक और बौद्धिक अनुशासन शिक्षा की रीढ़ होना चाहिये।

एक टिप्पणी भेजें

आपकी अमुल्य टीपणीयो के लिये आपका हार्दिक धन्यवाद।
आपका हे प्रभु यह तेरापन्थ के हिन्दी ब्लोग पर तेह दिल से स्वागत है। आपका छोटा सा कमेन्ट भी हमारा उत्साह बढता है-