जैन सिक्के एवं डाक टीकीट

Posted: 21 अप्रैल 2009
जैन सिक्के एवं डाक टीकीट

स्थानका वासी सम्प्रदाय के आचर्य रुघनाथ जी के शिष्य संत भीखन जी (आचार्य भिक्षु) ने विक्रम सवत १८१७ में
तेरा-पथ का प्रवर्तन कियाआचार्य भिक्षु ने आकार शुद्धि और सगठन पर बल दियाएक सूत्रता के लिई अनेक मर्यादाओं का निर्माण कियाशिष्य-प्रथा को समाप्त कर दियाथोड़े ही समय में एक, आचार और विचार के लिए तेरापंथ जन-जन में बस गयाआचार्य भिक्षु आगम के अनुशील द्वारा कुछ नये तत्वों को सामने लाएसामाजिक
भूमिका में उस समय वे अपूर्व -से लगेआध्यात्मिक द्रष्टि से वे बहुत मूल्यवान हैकुछ तथ्य वर्तमान समाज के पथ -दर्शक बन गए हैभारत -सरकार ने इसे महान आचार्य भिक्षु स्वामी पर डाक टीकीट जारी कर उनके द्वारा किये कार्यो का अनुमोदन कर जैन समाज को अनुग्रहीत किया.


तेरापंथ के नवं आचार्य श्री तुलसी जिन्होंने अणुव्रत माध्यम से जैन धर्म को जन जन में फैलायाजब देश में आजादी की अफरा तफरी थीमानवीय मूल्यों को चोट पहुच रही थी उस वक्त आचार्य श्री तुलसी ने एक ऐसे आन्दोलन की नीव धरी जो गरीब के झोपडे से लेकर राष्ट्रीयपति भवन तक अणुव्र्त -आन्दोलन कि अलख जगाकर जन चेतना का कार्य किया। उनकी जन सेवाओ को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने डाक टीकीट जारी कर उनके द्वारा किये कार्यो का अनुमोदन कर जैन समाज को अनुग्रहीत किया.


गवान् महावीर के-" जियो और जीने दो" शब्दों से पूरा विश्व भली भाति परिचित हैजैन धर्म के २४ वे तीर्थंकर भगवान् महावीर के २६०० वे जन्म कल्याणक मोहत्सव पर नेपाल सरकार २५० रुपये का सिक्का जारी किया .
Coin Nepal



Half Anna 1616
स्ट इंडिया कंपनी १६१६ में भगवान महावीर के नाम आधा आन्ना के ताम्बे के सिक्के जारी कर जैन धर्म की महत्ता को जाना .

Oldest Jain tankas
जारो वर्ष पुँर्व जय राजाओं के समय भी सोने के टके भगवान महावीर के मुद्रित नाम से चलते थे


Jainyantra ८२९७
ञ्च धातू से निर्मित यह यंत्र भी वास्तुकला का एक नमूना है जो

10 comments:

  1. संजय बेंगाणी 21 अप्रैल, 2009

    १६१६ में भगवान महावीर के नाम आधा आन्ना प्रचलन होने की बात आज पता चली. शेष जानकारी थी... बताने के लिए आभार.

  2. ताऊ रामपुरिया 21 अप्रैल, 2009

    सिक्के के बारे में जानकारी आज ही मिली. डाकटिकट के हम खुद शौकीन हैं तो ये पता था. बहुत धन्यवाद आपकी इस नायाब जानकारी के लिये.

    रामराम.

  3. आशीष कुमार 'अंशु' 21 अप्रैल, 2009

    जानकारी के लिए आभार

  4. लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` 21 अप्रैल, 2009

    आपने महावीर प्रभु के नाम वाले सिक्कोँ के बारे मेँ बतलाया ये बहुत अच्छा लगा - "जय जिनेन्द्र "

  5. P.N. Subramanian 21 अप्रैल, 2009

    बढ़िया जानकारी. एक समस्या है. जिस सिक्के को १६१६ का बताया जा रहा है वह भ्रामक लगता है. प्लासी के युद्ध के बाद १७५७ में ही कंपनी का शासन चालू हुआ जब वे सिक्के जारी करने की स्थिति में रहे होंगे. इस सिक्के के नीचे जो एक और महावीर जी का सिक्का दिखाया है, वह भी सिक्का न होकर धार्मिक टोकन है. मुद्रा शास्त्र में ऐसे सिक्कों को रामतंका नाम दिया गया है. राम के अतिरिक्त भारत के अन्य देवी देवता यहाँ तक की सिख पंथ आदि के भी टोकन विद्यमान हैं.

  6. ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey 21 अप्रैल, 2009

    ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने भगवान महावीर का सिक्का जारी किया? अद्भुत!

  7. Shastri 21 अप्रैल, 2009

    इतिहास पढ कर अच्छा लगा !! लिखते रहे!

    ईस्ट इंडिया कंपनी १६१६ में भगवान महावीर के नाम आधा आन्ना के ताम्बे के सिक्के जो चलाये वह कहां से कबाड लिया. एकाध सिक्का बिकाऊ हो तो मुझे बतायें क्योंकि भारतीय सिक्का संग्रह तो मेरा शौक है.

    सस्नेह -- शास्त्री

  8. Dr. Chandra Kumar Jain 21 अप्रैल, 2009

    रोचक और महत्वपूर्ण जानकारी
    के लिए आभार. यह जैन जगत् और
    समग्र मानवता के लिए गौरव का विषय है.
    =================================
    डॉ.चन्द्रकुमार जैन

  9. HEY PRABHU YEH TERA PATH 21 अप्रैल, 2009

    @P.N. Subramanian ने कहा…
    बढ़िया जानकारी. एक समस्या है. जिस सिक्के को १६१६ का बताया जा रहा है वह भ्रामक लगता है. प्लासी के युद्ध के बाद १७५७ में ही कंपनी का शासन चालू हुआ जब वे सिक्के जारी करने की स्थिति में रहे होंगे. इस सिक्के के नीचे जो एक और महावीर जी का सिक्का दिखाया है, वह भी सिक्का न होकर धार्मिक टोकन है. मुद्रा शास्त्र में ऐसे सिक्कों को रामतंका नाम दिया गया है. राम के अतिरिक्त भारत के अन्य देवी देवता यहाँ तक की सिख पंथ आदि के भी टोकन विद्यमान हैं.

    सर जी इस बात कि पुख्ता जानकारी मेरे पास भी नही है। जॉस करके जानकारी देने कि कोशिस करुगा।
    शायद शास्त्री जी तकनिकि आधार पर कुछ बता सके तो

  10. बेनामी 21 जुलाई, 2011

    pls visit www.jagathitkarnioriginal.org

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