GeT wElL SoOn.....bLoGeRiYa.....ब्लोगेरिया

Posted: 09 फ़रवरी 2009



एक विज्ञापन:श्री ब्लोगकुमारजी के जन्म से: ब्लोगेरिया

म्माननिय चिठ्ठाकारो,

प जो पढ रहे है वो एक विज्ञापन है। जब से चिठठे लिखने का चलन हुआ तब से लेखन के क्षेत्र मे क्रान्ति का सुत्रपात हुआ है। यह बात स्वीकार करने मे कोई अतिशियोक्ति नही। पुराने समय मे अगर कोई लेखक, साहित्यकार, लिखता था, वो आज से ज्यादा जटिल हुआ करता था. साथ ही साथ लिखने का तरिका बोरिग भी था। ढेर सारी नोटबुको को खराब किया जाता था, कभी पेन ठीक-ठाक काम न करती तो बिच रास्ते मे ही नोट बुक तकिये के निचे दबा कर सो जाते थे। कभी लिखने का मन हुआ तो नोटबुक जगह पर नही मिलती या बच्चे बिच के पन्ने ही फाड डालते। फिर बाजार से नई नोट बुक पेन लाते और चार पॉच-पन्नो को भर देते। ऐसा करते करते एक से अधिक नोट-बुके हो जाती जो आधी से उपर कोरी पडी हुई अपने किस्मत को रोती थी। होली दिवाली पर भाभी, मॉ सफाई करते वक्त तो ऐसी आधी अधुरी लिखि नोट बुके घर के माले पर कचरे के सग पडी मिलती । अक्षर साफ सुन्दर नही होने कि वजह एक भले लेखक कि रचना अखबारो के दफ्पतर मे रद्दी कि टॉकरियो मे घुल चाटती थी। कुल मिलाकर उस जमाने मे विद्वान साहित्यकार लेखक तो एक से एक थे पर यह यन्त्र-तन्त्र कि कमी थी। ईसलिये कई लेखक तो अपने विचारो के साथ ही दफन हो गये। पुराने साहित्यकारो, लेखको, पत्रकारो को एक वर्ग विशेष या जाती विशेष कि तरह देखा जाता था। खादी का कुर्ता पाईजामा, एक पेन उपर के जेब मे, गले मे लम्बा झोला हुआ करता था,पेरो मे चपल और रस्सीयो से बन्धा हुआ चश्चमा गले मे लट्का हुआ होता था। काले कलर के बडे से बेल्ट मे हाथ कि कलाई पर स्वीस घडी होती थी। घडी से उपरोक्त साहित्यकार कि बडे-छोटे होने कि स्थिति का ज्ञान हो जाता था। अमुमन यह सभी लेखको कि वेशभुषा थी। मतलब एक अलग बिरादरी जैसा महसुस होता

था।

ज का लेखक जेन्टलमेन बन गया है । पेरो मे महगे जुते, हाथमे लेबटोप, महगा सेल फोन, ब्लेक चश्चमा, जिन्स पेन्ट वाले लेखक साहीत्यकार भरे पडे है। अक्षर मक्खीयो कि टॉगो जैसे है,पर कम्पुटर ने सुन्दर बना दिया. विचार-दर्शन गुगल कि साईट से मिलते है और कापी-पेस्ट के जरिय रोशन होने के फिराक मे रात रात भर सिगरेटो के धुऐ के गुब्बारो मे खाक छानते कम्पीयूटर द्वारा। भाई जमाना ही बदल गया है। इसे कहते है लेखन-क्रान्ती। खेर इस विषय को यहॉ छोड कर मुख्य बात पर आया जाये।

चिठठे लिखना या उसके माध्यम से अपने विचार प्रकट करना कभी मे गलत नही हो सकता। ना ही चिठठे लिखना कोई ब्लोगेरिया का रोग है। हिन्दी चिठाकारो ने हिन्दि भाषा को दुनिया भर मे आम जन कि भाषा बनाने मे महत्वपुर्ण भुमिका निमाई है। अपनी भावना विचार या टीपणीयो को अब स्वतन्त्र रुप से व्यक्त करने का हमे (हिन्दी चिठाकारो को) सुहनेरा अवसर प्राप्त हुआ है। ना डाक का झझट ना फैक्स ना टेलिप्रिन्ट का सब कुछ सरल हो गया है श्री ब्लोग कुमारजी के जन्म से।

र इसका दुसरा पहलु भी है । अगर आदमी कृष्ण भक्ती कि तरह ब्लोग भक्ती मे लग जाये तो क्या ? रात दिन २४ धन्टा ब्लोग भक्ती! तो कैसा होगा हमारा चिठाकार। ब्लोगेरिया जैसा नही होगा ? जैसे एक आदमी रोज सवेरे उठकर नहा धोकर मन्दिर जाता है भगवान के दर्शन करने, वो एक आध घन्टे मे लोट आता है घर को। अगर वो पुरा-पुरा दिन मन्दिर मे ही बैठकर भजन किर्तन करेगा तो घरपरिवार वाले क्या कहेगे ? भाई यह तो साधु-महात्मा हो गया है।सी तरह ब्लोग लिखने मे समय, उम्र, स्वास्थय, बच्चे, शिक्षा, व्यापार, नोकरी, प्यार, पत्नी, मॉ, ऑखो, का अतिक्रमण होता है तो कैसे व्यक्ती विशेष के लिये "भाला हो रहा है," कहा जा सकता है। हम ऐसे अतिकर्मणीयो को सन्यासी नही ब्लोगेरियासी कहेगे।

प सभी ने मेरी ब्लोगेरिया से सम्बन्धीत तीन पोस्ट को पढा है। लोगो कि कमेन्ट के साथ साथ पीडीत व्यक्तियो के घर परिवार या दोस्त रिस्तेदारो के सैकडो ई-मेल मुझे मिले है जो ऑफ द स्क्रिन थे। और ऐसे मेलकर्ता अपने पुत्र, पति, पत्नि, बेटी, बहु के लिये चिन्तित थे । उदारहण के लिये दो ईमेल का जिक्र कर रहा हू (परिचय को छुपा रहा हु) एक मॉ ने मुझे लिखा-

" आपने सही लिखा है, मेरा २४ वर्ष का बेटा पाच महिने से ब्लोग पर लिखता है जिससे वो रात को २-३ बजे सोता है। छुटि के तो दिन पुरी पुरी समय चिपका रहता है। जिस कारण से पुरा टाईम टेबल खराब हो गया है उसका। मुझे उसके भविष्य कि चिन्ता है।

(इसे कमेन्ट मे साझा नही करे॥॥॥")

क दुसरा ईमेल लेते है -यह भी एक महिला है जो अपने ६५ वर्षिय पति को लेकर चिन्तित थी।

" जब से उसने ब्लोग बनाया उसने अपनी दिनचर्या को ही बदल दिया। अब शाम को वॉक पे नही जाते। सुबह चार बजे उठने वाले सोते है चार बजे। कल ही आखे चेक करा कर लोटे बोले रहे थे कि डॉक्टर ने कहा है चश्चमे का दॉई ऑख मे आधा व बाय ऑख मे भी उससे थोडा ज्यादा नम्बर बढ गया है नया कॉच बनाना पडेगा। रात मे दो तिन बार चाय पि जाते है।अगर ऐसा ही चलता रहा तो बिमारिया उन्हे घेर लेगी। ब्लोगेरिया पर आपने लिखा वो मेने उनको (पति) पढाया, मुझे तो बहुत ही खुशी हुई पढकर कि शायद कोई तो रास्ते निकल जाये।

(प्लिज डू नोट प्रिन्ट)

दोस्तो ऐसे मे चिठाकारो के लिखते समय अनुशान ना रखने कि वजह से कई कठिनाईया आ गई है जैसे चिठे लिखते-समय सिगरेट, चाय- काफी, मावा, गुटका, का सेवन अधिक मात्रा मे होने लगा है। क्यो कि ब्लोगनशे मे पत्ता ही नही चलता कि हम क्या कर रहे है। यह हमारे स्वास्थय से झुडा मसला है- इसे मजाक मे नही लेना चाहीये।


मेरा मानना है कि लोग ब्लोग लिखे, पर नियमबद्ध होकर लिखे। अनुशासन व नियमावलीयो का सख्ती से पालन करे। मेरा ऐसा मानना है कि बच्चे इस चक्कर मे ना पडे, केवल अपने भविष्य को पर ध्यान केन्द्रित करे।

मै चाहता हु कि वरिष्ठ नागरिक ब्लोग लिखे पर समय से वॉक करे, खाना खाये, थोडा समय अपने पोत्रो को दे, आन्टी को दे, दवाई बराबार से ले। डाईबिटीज के मरिज ब्लोग पर महिने मे चार से पाच घन्टा से अधिक ना बैठे क्यो कि ऑखे खराब हो सकती है। ज्यादादेर बैठने से सुगर लेवल बड सकता है। जिससे लिवर किडनी पर असर होने के प्रबल चान्स है। ज्याददेर बैठने से पेरो मे सुजन आ सकती है। ऐसी हजारो कठिनाईया है अधिक समय तक ब्लोग लिखने देखने मे। ऐसे सैकडो सवाल है जो हमारे समक्ष फन फैलाए खडे है।

ब्लोगेरिया से पिडित लोगो के लिये हमारी एक टीम विस्तृत एवम सटीक समाधान ढुढने मे लगी हुई है. भविष्य मे जल्दी ही उसे लोगो के समक्ष लाया जाये ऐसा हमारी भावाना है। पर इससे पहले मै आप सभी सम्मानित ब्लोगकर्तओ से निवेदन कर रहा हु कि आप हमे सिरियसली उपरोक्त बिमारी से पिडीत लोगो के अच्छे स्वास्थय को कैसे बानाये रखे ? के बारे मे सुझाव, ईलाज भेजे जो हमारी टिम के लिये रिपोर्ट बनाने मे साहयक होगी। आपका योगदान देश समाज परिवार एवम ब्लोगजत कि जय विजय के लिये हो ऐसी मे आपसे आशा रखता हु।


ब्लोगेरिया के ईलाज भेजने के निचे दिये नियम को पढे>

आगे बढे>आपके लिये>अपने लोगो के लिये> सहयोग का हाथ बढाये>


अमुन हम सभी ब्लोगेरिया से शिकार है अथवा "हे प्रभु" लोगो कि ईच्छा अनुरुप पर आपके सुझाव आमन्त्रीत कर रही है। आप सभी से अनुरोध है आप इसमे भाग लेकर अपनी बिरादरी के स्वास्थता, लम्बे आयुष, एवम उनकी खुशियो के लिये अपना अमुल्य सुझाव देकर ब्लोगजगत की जयजयकार के हिस्सेदार बने। आपके द्वारा प्रदत ईलाज, नियमावली, सुझाव, दवाई योग क्रिया, खानपान, ईत्यादि हम अपने रिचर्स टीम के हवाले करेगे जो बाद मे यह तय होगा कि चिठाकारो कि असली समस्या क्या है ? लापरवाही के क्या कारण है? कम उम्र के युवाओ को कैसे और कब चिठेजगत से झुडना है। सभी तरह के विचारो को जानने के बाद हम अपनी एक रिपोरट सार्वजनिक तोर पर प्रसारित करेगे। जिसमे ब्लोगजगत कि समस्या एवम निवारण पर सटिक बात हो सकेगी।


इसको समस्या के हल को अच्छा प्रतिसाद मिले इसलिये प्रतियोगता के रुप मे पेश किया जा रहा है।

आपके सुझावो का स्वागत है

GeT wElL SoOn......... bLoGeRiYa
"( गेट वेल सून ब्लोगेरिया ) प्रतियोगता

1st, Prize 2100Rupee
2nd,Prize 1100Rupee
3rd,prize 500Rupee

contact at- HEY PRABHU YEH TERA PATH

BLOG NAME:=: http://ombhiksu-ctup.blogspot.com/

Emill:= ctup.bhikshu@gmail.com

Sponserd by- simco poly tex (india)health and welfare division mumbai, through hey prabhu yeh terapanth hindi blogs india, for Public interest

नियम:-

१ सभी भाग ले सकते है।

२ प्रतियोगता मे ऐसे सुझाव को शामिल क्या जायेगा जो हे प्रभु यह तेरापन्थ के कमेन्ट बोक्स द्वारा भेजेगा।

३ अग्रेजी एवम हिन्दि दोनो भाषा मे कमेन्ट भेज सकते है।

४ आपके कमेन्ट सुझाव ६०० शब्दो से अधिक नही होने चाहिये।

५ प्रतियोगता मे आज से २४ फरवरी २००९ रात्री १२ बजे तक प्राप्त सन्देशो को ही शामिल किया जायेगा।

६ कोई भी सुझाव या कमेन्ट के साथ निचे मे आपका वेलिड ई मेल पता होना चाहिये। ताकि हम आपसे सम्पर्क कर सके।

७ कोई प्रतियोगता मे अपना नाम नही प्रसारित करना चाहता है तो वो mahaveer_b@yahoo.com इस पते पर सुझाव मेल कर सकते है

जो प्रतियोगीता से बाहर रहेगे।

८ all rights reserved by -HEY PRABHU YEH TERA PATH
९ judicial area in mumbai
१० terms & condition अपपल्य

त्रृटी के लिये करबद्ध क्षमा करे।

(सभी फोटु बडा करने के लिये उसपर चटका लगाये।)



7 comments:

  1. Shastri 09 फ़रवरी, 2009

    ब्लागेरिया का सबसे कामयाब इलाज है, हर दूसरे दिन किसी न किसी चिट्ठाकार से पंगा लेना शुरू कर दो. एक महीने में ब्लागेरिया का भूत हमेशा हमेशा के लिये उतर जायग!!!

    सस्नेह -- शास्त्री

    -- हर वैचारिक क्राति की नीव है लेखन, विचारों का आदानप्रदान, एवं सोचने के लिये प्रोत्साहन. हिन्दीजगत में एक सकारात्मक वैचारिक क्राति की जरूरत है.

    महज 10 साल में हिन्दी चिट्ठे यह कार्य कर सकते हैं. अत: नियमित रूप से लिखते रहें, एवं टिपिया कर साथियों को प्रोत्साहित करते रहें. (सारथी: http://www.Sarathi.info)

  2. ताऊ रामपुरिया 09 फ़रवरी, 2009

    शाश्त्री जी की बात पर ध्यान दिया जाये. :)

    वैसे महीना भर की जरुरत नही पडेगी. महिना भर मे तो पक्के और शातिर ब्लागेरिया रोग का इलाज हो जायेगा. नये नये तो बस दो तीन पंगों मे ही बाहर नजर आयेंगे.:)

    रामराम.

  3. परमजीत बाली 09 फ़रवरी, 2009

    अच्छी पोस्ट है।विचारणीय।

  4. ѕαηנαу ѕєη ѕαgαя 09 फ़रवरी, 2009

    [red][b]मैं आज आपको एक बहुत ही मार्मिक पोस्ट पड़ने के लिए आमंत्रित करता हूँ ,अगर समय है तो एक नजर डालें और अपनी राय दे .क्योंकि यह कहानी सिर्फ उस लड़की की ही नहीं हमारे बच्चों या दोस्तों की भी हो सकती है !!
    http://yaadonkaaaina.blogspot.com/2008/12/12th.html

  5. ѕαηנαу ѕєη ѕαgαя 09 फ़रवरी, 2009

    आपकी प्रतियोगिता मे मैं भी भाग ले रहा हूँ!!!
    बहुत बढ़िया!!

  6. योगेन्द्र मौदगिल 10 फ़रवरी, 2009

    कमाल है.... आप भी गुरू निकले.....

  7. बेनामी 14 नवंबर, 2012

    इस नये ब्लोग को देखिये
    hindi time

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