शहशाह दुखी- बादशाह भी डरे- आमिर खान आरपार कि लडाई के पक्षधर॥॥

Posted: 06 दिसंबर 2008
चिट्ठाजगत
बादशाह को भी डर
हि
न्दी सिने जगत के सुपरस्टार बदशाह शाहरुख खान मुम्बई मे हुऐ आतकवादियो के हमले से सहमे हुये है, उन्हे अब डर लगने लगा है, अपने परिवार एवम बच्चो के लिये। बादशा खान आगे कहते है -"देश बडे ही डरावने समय से गुजर रहा है। जनता का गुस्सा स्वभाविक है। यह डर मुझे ही नही पुरे हिन्दुस्थान का है। ऑतकवादियो से कहते है-" तुम भुल गये हो अल्ला के ईस्लाम को, अल्ला के ईस्लाम को जानिये। कुरान बाईबल या गीता किसी मै यह नही लिखा है कि ईन्सानो को मार कर कोई जनत मिलती है। कुरान मे कही भी इस तरह के घिनोने कृत्यको जगह नही दि गई है। दो तीन शाल पहले मै ईस्लाम को ऑतकवाद नही मनता था ,अब मै कहता हु कि जो ऑतकवादी है वो ईस्लामीक नही है। मुझे मेरे देश के लिये अब अधिक समय निकालना है क्यो कि यह बडा प्यारा है। शाहरुखन ने यह बात IBN7 के राजीवसरदेसाई को दिये ईन्टरव्यू मे कही।

राजनीतिक दल है जिम्मेदार_ आमिर खान
मु
झे और मेरे बच्चो को आतकवादी बन्धक बना ले तो मै
अपनी सरकार से यह कहने के लिये मानसिक रुप से तैयार रहुगा
मेरे बच्चो की परवाह न करे, और देश के व्यापक हीत मे आतकवादियो को मार गिराये।-आमिर खान
मुम्बई। आमिर खान का मानना है कि आतकवाद को बढावा देने के लिये सभी राजनीतिक दल जिम्मेदार है और आतकवाद केवल एके ४७ से ही नही फैलाया जाता बल्कि हर वह काम, जिसमे आम आदमी के दिल मे दहशत पैदा हो आतक कि श्रैणी मे आता है। और इसे रोकने के लिये जरुरी है कि आतकवादियो से किसी कि जान के बदले मे कोई सोदा नही किया जाये।
आमिर ने अपने ब्लोग मे लिखा है इस घटना से पहला सबक तो यह मिलता है कि हमे आतकवादियो के साथ कोई सोदे-बाजी नही करनी चाहिये। आतकवादियो को यह स्पष्ट सन्देश दिया जाये कि भारत आतकवादियो से कोई समझोता वार्ता नही करेगा। इसका साफ मतलब है कि भविष्य मे अगर कभी इस तरह के हालात बनते है कि मुझे और मेरे बच्चे को कुछ आतकवादी बन्धक बना ले तो मै अपनी सरकार से यह कहने के लिये मानसिक रुप से तैयार रहुगा मेरे बच्चो की परवाह न करे और देश के व्यापक हीत मे आतकवादियो को मार गिराये।
आमिर खान ने आगे अपने ब्लोग मे लिखा है -"काग्रेस और भाजपा सरकारे आतकवाद से निपटने मे नाकाम रही है। मुम्बई पर आतकी हमले ने काग्रेस नीत युपीए की अक्षमता जाहीर कर दी, जबकि भाजपा शासन काल मे इण्डियन एयरलॉइस के अपहरण कि घटना ने सरकार को लासार बना दिया था।
स घटना मे बन्धको को छुडवाने के लिये राजग सरकार ने जिन्हे रिहा किया वह तीन खतरनाक ऑतकवादि और पाचो अपहरणकर्ता भारत को एक बार फिर निशाना बनाने की तैयारी करने लगे। इससे पहला सबक यह मिलता है कि हमे किसी भी हालत मे आतकवादियो से कोई सोदा नही करना चाहिये। (NBT ४१२२००८)

टुट चुका है बान्ध : अमिताभ
मु
म्बई। बालिवुड क्र दिग्गज अभिनेता अमिताभ बच्चन ने मुम्बई बम हमलो को लेकर उत्पन्न जनाआक्रोश कि तुलना एक ऐसे बान्ध से कि है जो फूट गया है और उसमे से अनियन्त्रित पानी लगातार बह रहा है।
भिताभ ने अपने ब्लोग मे लिखा है कि इन हमलो से देशवासी बहुत व्यथित और गुस्से मे है। यह व्यथा और गुस्सा किसी न किसी रुप लगातार जाहिर होता जा रहा है। उन्होने लिखा है कि किसी भी लोकतान्त्रिक व्यवस्था मे निर्वासित प्रतिनिधियो और देश को चलाने के लिये प्रशासन कि जरुरत होती है। आज जो हालात है, उनमे राजनितिज्ञो और प्रशासन दोनो के लिये उदासीनता के भाव है। हर जगह केवल सवाल उठ रहे है। अभिताभ ने आगे अपने ब्लोग मे लिखा है कि विश्वास कि कमी और खिझ दिखाई पड रही है। खिझ का कारण विश्वास टुटना नही है खिझ इसके लिये है क्यो कि समाधान देने वाला कही दिखाई नही दे रहा है।ऐसा लगता है बान्ध टुट चुका है
(NBT 4122008

I want to do something, but what can I do?” करन जोहर

फिल्म निर्मात अपने ब्लोग मे क्या कहते है देखे। वो दुखी है मुम्बई अटैक से। वो कहते है पहले अपने घर परिवार के आपसी रिस्तो मे विश्वास पैदा करना पडेगा। एक दुसरे को समझना पडेगा। हमे एक साथ आतकवाद से मुकाबला करना होगा। देखे वो आगे क्या लिखते है -"I was in New York when news broke that Bombay was under attack.For someone who’s been born and raised in this magnificent city, this is easily one of the most shattering things to hear - and see. And that’s all I could do. Glued to my television in a hotel room far too far away from where this massacre was taking place, I absorbed everything I saw and everything I heard. Everyone had a sound byte. Everyone had to come out and express his or her opinion; The NSG should be applauded. The Media should be praised. Certain politicians should be bashed. I agree with most of what’s already been said. Some have been eloquent and some have sounded like loud, misinformed banshees. Collectively we’re grappling with the ineffectiveness of the system and what was presented to us as information. Politicians, soulless and emotionless, were addressing the country while reading off of Teleprompters. Can you not feeling anything? Can you say nothing to make us feel just a little more secure in your hands? .
I can’t offer a unique perspective on this yet because my grievances at this moment are primarily observations on humanity. The most common thing I hear from people is, “I want to do something, but what can I do?” The answer to this question has resulted in candlelight vigils and sms’s to wear black clothes or light a candle in our windows to show support and solidarity. It’s all very well and good because it is therapeutic. Our natural instincts veer us towards acting out – or at least towards being more active. In times like these, it becomes a challenge to look at the big picture. Terror attacks, massive loss of life – the reality eventually forces you to look at how we react individually and as a collective community.
Our focus has now shifted to something so much bigger than us, but in order to fight this fear, in order to regain confidence as a city, we must strengthen ourselves. We must fix our problems at home before we can tackle attacks from outside

आतकवाद के खिलाफ शास्त्रीजी ने ऊठाई मशाल ए कलम॥।

मैने कल सारथी चिट्ठे पर शास्त्रीजी कि आतकवादियो के खात्मे कि मुहिम को पढा। मै उनकि इस लडाई मै मेरी सहभागिता जताई। फिर सोचा यह तो लिखने लिखाने कि बात रह जायेगी। आतकवादियो के खिलाफ इस मुहिम मे हर व्यक्ति को अपने अपने ढग से योगदान देना चाहिये। क्यो कि आप और हम बन्दुक उठाकर सिमा पार तो जा नही सकते है। हॉ इतना तो जरुर कर सकते है कि पुरे देश मे आतकवादियो के खात्मे कि जन लहर पैदा करे। सरकार को मजबुर करे कि अमेरिका कि नहसियत को मारो गोली और सीधे आक्रमण करो पाक पर, नेस्तोनाबुद कर दो उन्ह ठिकानो को जहॉ से आतकवादि जन्म लेते है। सोनियाजी॥ झॉसी कि रानी बनने के लिये समय अच्छा है उपयोग करो देश याद करेगा आपकोलोगो के मनो मे क्रान्ति कि एक लहर पैदा हो इसलिये उपरोकत विचारो कि प्रस्तुति देकर यह मेरा छोटी सी तमन्ना को पुरा कर रहा हु। शास्त्रीजी आपने जिस कलम को बदुक का रुप धारण कराया है यह हम ब्लोग बिरादरी के लिये फक्र गर्व कि बात है कि हम भी देश कि इस लडाई मे पिछे नही है। महावीर

5 comments:

  1. Shastri 06 दिसंबर, 2008

    आलेख सार्थक है एवं सामयिक है. आज जरूरी है कि बार बार इस तरह लोगों को चुनैती दी जाये.

    1. मेरे जिस आलेख की आपने चर्चा की है उसके लिये मुझे दिनेशराय जी से प्रेरणा मिली थी.

    2. अपने आलेखों में विभिन्न रंग सिर्फ विशेष कार्यों के लिये करें. काले अक्षर सबसे अधिक पठनीय होते हैं अत: आलेख के लिए अधिकतर काले अक्षरों का प्रयोग करें.

    सस्नेह -- शास्त्री

  2. vimi 09 दिसंबर, 2008

    Not politicians(who want power for themselves) but leaders(who want the country to be powerful) are needed for our country.

  3. Amit 15 दिसंबर, 2008

    accha likha hai aapne..aur saath main bahut aabhaar aapka...mere blog per aake mera utsaah wardhan karne ke liye.....

  4. Pyaasa Sajal 24 दिसंबर, 2008

    Aamir Ji ki baate apni soch se sabse adhik mel khaati mahsoos huyi mujhe

  5. lankaflorist 12 अक्तूबर, 2009

    Send Gifts to Srilanka, Flowers to Srilanka, Cakes and Chocolates to Sri Lanka and Colombo.

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