कथ्य का तथ्य

Posted: 17 सितंबर 2008

कथ्य का तथ्य
लेखक : मुनि श्रमन सागर
प्रस्तुति : महावीर बी सेमलानी

आचार्य महाप्रज्ञ फरमाया करते है, वर्णमाला मे ऐसा कोइ अक्षर नही है जो मन्त्र न हो ! सब कुछ तो है- वर्णमाला मे वर्णमाला मे अतिरिक्त मन्त्र और क्या है ? यही जयसेन - प्रतिष्ठा - पाठ कहता है -
"अकारादि सकारान्ता वर्गा प्रोक्तास्तु मात्रुका,
स्रुष्टिन्यास , स्थितिन्यास , सम्ह्रुतिन्यास , तास्त्रिधा !!
"
अकार से सकार तक के वर्ण मात्रुका कहलाते है ! इन्ही मात्रुकाओ मे स्रुष्टि , स्थिति और सहार् इन्ह तीनो रुपो का न्यास है!
बेशक जितने मन्त्र है, वे सारे मार्तकाओ से बने है , पर मन का वितर्क था -
"ॐ " जिसे प्रणव माना गया वह कोन सी वर्णमाला का आकार - प्रकार है ? हर परम्परा मे की कुछ अलग थलग
आक्रति है! सारी वर्णमालाओ से भिन्न वह ॐ , है क्या आखिर? प्रत्येक मन्त्र का प्रारम्भ व्यक्त अव्यक्त प्रणव से ही होता पाया गया है !
किसी भी इष्ट नाम को जपे जाओ , जपे जाओ , वही मन्त्र बन जायेगा! प्रणव हो या न हो ! राम - राम हो या और कोई , जपते - जपते निश्चत सिध्दि मिलेगी !हर साधक की अपनी अपनी अनुभूतिया है !
एक बार भन्डारी सम्पतमलजी सा जोधपुर से ऐसी ही चर्चा चल पडी! क्या स्वामी जी का नाम
भिखु - स्याम मन्त्र है ? भन्डारी जी यथार्थ वादी माने जाते रहे है ! हकिम साहब ने बताया - साध्वी किस्तुराजी ( मान्ढा) जिनसे हमे ये सारे जीवन सस्कार मिले है- वे २२ वर्ष जोधपुर मे सिथरवास विराजी ! उन्ह जैसी पवित्र साध्वी कहा ? उनका जिवन बोलता हुआ साधुत्व था ।उन्ह जैसी आब -अदब आज दुर्लभ है। वे देख्नने मे काच की पुतली सी , स्नेहिल सजग, ओजस्वी, आगमविज्ञ , कुशल कलाकार , कडक अनुशासी । जिनकी वाणी मे अपनत्व घुला - मीठास था । वे सौजन्य की प्रति मूर्ति , मुह बोलती श्र द्धा , पुरानी धारणाओ का अक्स्य - कोष , इतिहास परम्परा की मर्मज्ञ , आचार्यो की विश्वास पात्र और निर्लप - कमल जैसी साधिका थी । उनसे किसी ने प्रशन किया था - क्या स्वामी जी का नाम मन्त्र है ? उन्हे तेरापन्थ के ६ आचार्यो कि उपासना का सौभाग्य मिला था - (रिषिराय से कालु गुणी तक) उन्होने आठो ही आचार्यो के सन्तो को देखा। वे कहने लगी - स्वामीजी ! स्वामी जी सिद्ध योग पुरुष थे । उन के ६ -७ पिछले जन्मो की योग सिद्धिया सस्कारो मे थी । वे इस विधा मे निपुण थे । घण्टो - घण्टो ध्यान किया करते थे । स्वामीजी क श्वासो - श्वास बहुत लम्बा और गहरा था। एक श्वासी लोगस तो
रोज कि बात थी । क्रमश ................
समाचार

सिरियारि १३ सितम्बर ।
तेरापन्थ के आघ प्रवर्तक आचार्य श्री भिखु स्वामी का १०६ वा निर्माण महोत्सव राजस्थान के पाली जिले मे सिरियारि ग्राम मे आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी विद्वान शिष्य मुनि श्री सागरमलजी "श्रमण" एवम सहयोगी मुनिवर के सान्धिय मे करीब ३०००० श्रावको कि उपसिथति मे मनाया गया । सुबह से अख्ण्ड जाप "ॐ भिख्सु जय भिख्सु'' मध्य रात्रि तक चलता रहा।
ह्जारो लोगो के उपवास थे, भिख्सु समाधि स्थल सिरियारी के प्रमुख श्री सुरेन्द्र जी सुराणा मन्त्री श्री किरणराजजी गदैया व कार्यकरताओ ने सम्पुर्ण व्यवस्था को सुचारुअ रुप देख रहे थे । प्रभात फैरी प्रातः ८ बजे से शुरु हुई, जिसमे ह्जारो भिखु भक्त ग्राम भर धार्मिक नारो एवम गितिकाओ से वातावरण को भिखु स्याम - भिखु स्याम बना दिया।
ठिक दोपहर २।३० बजे हेम अतिथि ग्रह मे टोप टेन सन्गीत प्रतियोगता का शुभ आरम्भ हुआ । करीब ११० प्रतियोगीयो ने भाग लिया, १० विजेताओ को रात्रि धम जागरण कार्यक्रम मे गाने का मोका मिला।
८ बजे रात्रि धम जागरण कार्यक्रम महाप्रज्ञ मैदान मे मुनि श्री सागरमलजी "श्रमण के मगन्ल उध्बोदन से शुरु हुआ। जोधपुर पुलिस महानिरकक्षक श्री राजीव काशोद आयकर आयुक्त श्री
पी पी जैन जोधपुर, पाली पुलिस निरक्षक एस पी सहित सैकडो गणमान्य लोग थे।
गायिका मिनाक्षी भुतोडिया ने भिक्शु को अपनी कन्ठिल गायकि से सच्ची भक्ति प्रस्तुत कि। कमल सेठिया, सहित देश भर से
आऐ कलाकारो ने भिखु बाबा को पाचवे देवलोक मे बुलावा भेजा॥॥ करीब ३०००० लोगो ने सुबह ४ बजे तक भिक्शु कि अपनी अपनी तरह से अराधना कि। चाणोद वासी पुरे कार्यक्रम मे भाग लिया। हमारे कार्यकर्ता रमेशजी जिनेश बाबु भैया सेमलानी कि अगुवाई मे
भोजन प्रुस्कारी मै हाथ बटाया।
भिक्क्षु - दर्पण विमोचन हुआ ईसमे सी टी यु पी का विज्ञापन अन्तिम पुरा पेज पर था ।
१४/०९/२००८ ठिक १० बजे हम सभी २० लोग रामसिह का गुडा निवासियो
के आमन्त्रण पर साध्वी श्री रति प्रभा जी, कलाप्रभाजी, जयन्तमालाजी। सम्भवप्रभाजी के दर्शन किये। शान्तिलाल सेमलानी भाईन्दर एवम
हरिष श्री श्रीमाल ने परिषद की तरफ से गिति़का प्रर्स्तुत कि। रामसिह का गुडा सभा अध्यक्ष श्री मदनलाजी गदैया ने चाणोद सघ का स्वागत किया। चाणोद सघ के मन्त्री महावीर बी सेमलानी ने अपने भाषण मे गुडा वासियो का धन्यवाद दिया।
महावीर बी सेमलानी
























































































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