खामेमि सव्व जीवे सव्वे जीवा खमन्तु मे. मित्ति मे सव्व भूयेषु वैरन मज्झ न केणई

Posted: 12 सितंबर 2010
आदरणीय मेरे शुभचिन्तकगण मित्रो एवम भाईयो
जय जिनेन्द्र
आमोद प्रमोद के तो बहुत से पर्व है. पर ससार मे यह ऎसा एकमात्र पर्व है, जहॉ किसी अन्य भगवान, देव, पुजा, प्रसाद, मण्डप,या आडम्बर को माध्यम ना बनाकर व्यक्ती स्वय अपने कल्याण के लिऎ, आत्मकल्याण के लिऎ, आत्मलोचन करके प्रसन्न भाव से पर्युषण पर्व को मनाता है. यह पर्व चेतना को जागृत करता है. जिसमे उपशम की बात सिखाई जाती है.
भगवान महावीर के समग्र जैन घर्म को एक ही शब्द मे समाहित कर सकते है-"आत्मकल्याण और आत्मलोचन." इसलिये पर्युषण को पर्वाघिराज पर्व अर्थात सभी पर्वो का राजा कहा जाता है. इसमे आठो ही दिनो मे विविध आध्यात्मिक अनुष्ठानो का आयोजन होता है, जिसके अन्तिम दिन को सवत्सरी पर्व कहा जाता है. इस दिन दुनिया भर के करोडो लोगो उपवासमय रहते है. बच्चे-बच्चे को उपवास रहता है.
खामेमि सव्व जीवे सव्वे जीवा खमन्तु मे.
मित्ति मे सव्व भूयेषु वैरन मज्झ न केणई
"विगत 365 दिनो मे जाने अनजाने, अपके दिल को दुखाया हो तो मै पर्युषण महापर्व का आज सवत्सरी का प्रतिक्रमण करते हूऎ मन से वचन से काया से सरल हर्दय से खमत-खामणा करता हू, क्षमा मागता  हू."

महावीर बी सेमलानी और परिवार
हे प्रभु यह तेरापन्थ

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