मुम्बई का काला दिन, मेरी काली रात

Posted: 28 नवंबर 2008
चिट्ठाजगत

महानगरी मे लस्कर का ताण्डव,
46 घण्ठो से मुम्बई बेहाल,
लस्कर के ऑतकवादियो ने किया नाक मे दम।

रोज दोडने वाली मुम्बई परसो रात से ठहर सी गई है। चर्चगेट से लेकर विरार, छत्रपति शिवाजी ट्रमिनश से लेकर कर्जत तक कि सडके सुनसान पडी है। व्यापारिओ के प्रतिष्टान बन्द से पडे है। स्कुल, कॉलेज, बन्द कर दिये गये। शेयर बजार को बन्द कर दिया है। लोकल ट्रेने खाली चल रही है। लोग सहमे हुऐ है। पुरा महानगर ऑतकियो कि चपेट मे आ चुका है। ऐसा पहेले कभी नही हुआ कि मुम्बई कि रफतार थम गई हो ? १९९२ के बम ब्लॉस्ट को भी हमने देखा, तब भी मुम्बई दुसरे दिन दोड ने लग गई थी। जन जिवन सामन्य हो गया था। इसी स्प्रिट के लिये मुम्बई को जाना जाता है। किन्तु परसो से अब तक चल रही ऑतकवादियो कि दहशतगिरी ने मुम्बईकरो के दिल को झ॑झकोर के रख दिया है। अब तक बेकसुर लोगो के मरने कि सख्या 140 बताई जा रही है जो कई गुना बड सकती है। NSG कि करीब 20 टुकडीया नरीमन बिल्डिग, ताज महल हॉटल, ताज टॉवर, ऑबेरॉय हॉटल, मे कल से ऑपरेशन शुरु कर दिया था जो अभी तक चल रहा था। सेना ने पुरे मुम्बई को अपने कब्जे मे ले लिया है। फ्लैगमार्च के साथ गस्त को बडा दिया।
:-राजनितिकरण और आतकवाद:-
ल रात को खबर आई कि गुजरात के खुफिया विभाग (इन्टेलिजेन्श) ने महाराष्टारा के खुफिया विभाग को सुचना दी थी, कि समुन्द्रि रास्ते से 50 आतकवादी उसमे कुछ महिला भी है मुम्बई मे कारवाई कर सकते है। यही बात भारत के गृह मन्त्री शिवराज पाटील भी कहते है, महाराष्टारा के गृहमन्त्री आर आर पाटील इस बात कि जानकारी न होने कि बात कर अपना पल्ला झाडने लगे। आखिर क्यू हर बार आरोप प्रतिरोप मे ऑतकवादि गतिविदियो को नजर अन्दाज किया जाता है? खुफिया तन्त्र कि कहॉ चूक हो रही है ? अजमेर, दिल्ली, मालेगॉव, जयपुर, अहमदाबद के ऑतकी हमलो से, हमारी सरकारो ने क्या सबक लिया ? कहॉ सुरक्षा मे खामिया रही ? क्या मुठी भर दहशतगर्दियो का मुकाबला करने मे हम सक्षम नही ? क्या हमारी ईच्छा शक्ति कमोजर पड गई ? बेकसुर जनता कब तक सरकार एवम सुरक्षा ऐजेन्सीयो के बिच अपने परिवार के सदस्यो को मरते देखेगी ? शायद आज ऐसा महसुस हो रहा है कि ऑतकवाद हमारी कमजोर ईच्छा शक्ति, एवम लडने कि ताकत पर हावी हो गया है।
मुंबई पुलिस के एंटी टेररस्टि स्क्वैड (एटीएस) के चीफ हेमंत करकरे, एडिशनल पुलिस कमिश्नर अशोक काम्टे और एटीएस के एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के रूप में चर्चित विजय सालस्कर की शहादत ने दूसरे पुलिसकर्मियों के लिए एक मिसाल तो कायम की ही, यह भरोसा भी दिलाया कि हमारे पास ऐसे अनेक जांबाज सिपाही हैं, जो भारतीय राष्ट्र-राज्य की हिफाजत करने में पूरी तरह सक्षम हैं।
राजनेताओं को यह बात नहीं भूलनी चाहिए कि करकरे, काम्टे और सालस्कर जैसे अधिकारियों ने ही अपनी निष्ठा और समर्पण से जनता में सिस्टम के प्रति विश्वास कायम रखा है।
अगर यह विश्वास एक बार टूटा तो यह हमारे जनतंत्र के लिए भयावह संकट की शुरुआत होगी। हमारे नेतृत्व वर्ग को समझना चाहिए कि लगातार बढ़ती चुनौतियों के मद्देनजर हमें एक पारदर्शी और जवाबदेह पुलिस तंत्र की जरूरत है। अगर पुलिस का राजनीतिक इस्तेमाल और आतंकवाद को लेकर राजनीति जारी रही तो शायद हमें दूसरा करकरे नहीं मिल पाएगा। अब भी वक्त है। आतंकवाद को लेकर पॉलिटिक्स बंद हो। सरकार और विपक्ष दोनों को मिलकर आतंकवाद से जूझने की रणनीति बनानी चाहिए। यही शहीद पुलिसकर्मियों और इस हमले में मारे गए अन्य लोगों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
7 सितारा हॉटलो ऑबेराय टॉवर, ताजमहल, और ताज टॉवर मे दुनिया सहित भारत के नामी गिरामी राजनेता, उधोगपति, खिलाडी, अभिनेता रुकते है। शायद अब तक तो उनके वहॉ ठहरने कि सुचना नही मिली या कोई भी ऐसा नामी गिरामी व्यक्ति के हताहत होने कि ख्बर भी नही आई। पर कल इस तरह के समाचारो कि कोई पुष्टि होती है तो यह एक बडा नुकसान होगा देश के लिये या जिस देश के निवासी है वहॉ के लिये।
दुनियॉ इस पुरी घटना को दे़ख रही है, और मुम्बईवासी इस घटना को महसुस कर रहे है, जैसे मै ।
आप भारत के अलग अलग क्षेत्रो मे टी वी, अखबार, ब्लोगस पर देख,सुन एवम पढ रहे है, और मै इस पुरी घटना को महसुस कर रहा हु। क्यो कि मै यहॉ रहता हु।
:-मेरी एक रातः-
ल ‍रात मे जयपुर से मुबई पहुचा। मै रहता हु वेस्टन सबब मे। मेरे अजिज दोस्त सुरेश जैन जो दक्षिण मुम्बई के प्रार्थना समाज मे रहते है, के बुलावे पर स्टेशन से सीधे ही टेक्सी से उनके शो रुम जो गॉवदेवी मे है पहुचा। हम दोनो करीब एक महीने से मिल रहे थे। उनका एक दोस्त लोकेश जो अम्बेडकर नगर, कोलाबा पोलिस स्टेशन के पास कुलाबा मे रहता है । मोटरसाईकल से कुलाबा उसके घर पहुचे। वहॉ से हम तीनो कन्दिल रेस्टॉरेन्ट जो फोर्ट मे है, ( छ्त्रपति शिवाजी स्टेशन के पास) खाना खाने को लोकेश के घर से निकले।
(रात्री करीब दस, साढे दस बजे), गली के बहार आये ही थे कि लोगो के भागने / चिल्लाने कि अवाजे सुनाई पडी। जोर से बन्दुके चलने कि आवाजे कानो मे टकराई, समझ मे नही आ रहा था कि क्या हुआ। इतने मे घर से मेरी पत्नि का मोबाईल पर फोन आया। पुछा-' कहॉ हो ?" मैने कहा -" मुम्बई आ गया हु, और अब सुरेश के साथ हु। तभी उन्होने कहा,- "केपिटल सनीमा, छ्त्रपति शिवाजी स्टेशन पर हमला हुआ है, टी वी पर समाचार आ रहे है। कही बहार मत निकलना रात को भी सुरेशजी के घर पर ही सोने कि हिदायत दी ।" ईतनी ही देर मे सुरेश के घर से भी फोन आ गया । बोला जल्दी घर लोट आओ। मामला समझ मे आ गया था। प्रार्थना समाज से कोलाबा १५ से २० मीनट का रास्ता होगा, हमने हॉटल जाने का अपना कार्यक्रम रद्द कर दिया। इस बिच गोलियो कि आवाजे कानो से टकरा रही थी। पुलिस कि सायरनो की आवाज, एम्बुलेस सडको पर दोड रही थी। स्थिति बडी ही विकट महसुस होने लगी। चिन्तन चला क्या करे।
सुरेश बोला -" रात मेरे घर चल कर सो जाते है।" लोकेश को छोड कर हम दोनो मोटरसाईकल से ताज हॉटल के पिछे ईरोज थैटर वाले रास्ते से होते हुए निकले । लियोपोल्ड कैफे के ठिक सामने लोगो का हुजुम देखा। पुलिस भारी मात्र मै अर्लट स्थिति मे बन्दुके ताने खडी थी लियोपोल्ड कैफे की हालत से पता चल रहा था कि यहॉ भिषण गोलिबारी हुई है। कैफे के बाहर खुन बिखरा हुआ था। कैफे के शिशे टुटे पडे थे। लोग भाग रहे थे छिप रहे थे सुरेश ने भी मोटर साईकल का एक्सीलेटर दबाया तेज गति से हम निकलने लगे। रास्तो पर भीड थी, अफरातफरी थी। कैपिटल सनेमा, छ्त्रपति शिवाजी स्टेशन पहुचते पहुचते तो हिम्मत जवाब देने लग गई। दिल कि धडकने तेज हो गई। फायरिग कि आवाजे और तेज होने लगी तभी एक जोर से धमाके कि अवाज ने मेरे तो होश ही उडा दिये। रास्ते कि नाके बन्दी मे दो जगह रोक कर हमसे पुछताछ् हुई। जैसे तेसे प्रार्थना समाज सुरेश के घर पहुचे। हमारे चेहरे कि हवाईयॉ उडी हुई देख सुरेश कि पत्नि ने पुछा क्या बात है", घट्ना बताई। मै तुरन्त टी वी के सामने जाकर बैठ गया। सुरेश के घर पर पहले से आज तक समाचार आ रहा था। मैने स्टार न्युज लगाई। दिपक चोरसिया बोल रहे थे। मुम्बई के हर जगह की आतकवादियो कि करतुतो का ब्योरो चैनलो पर आ रहा था। स्थिति बिगडति नजर आ रही थी । तभी भाभी ने खाना परोछ कर ले आई। मटर कि सब्जी, मुग कि दाल जाडी रोटी (राजस्थानी खाना) साथ मे नमकिन और सलाद भी था। खाना खाने कि ईच्छा ही खत्म हो गई थी। भाभी के बोलने पर थोडा सा जाडी रोटी का टुकडा लिया और मुग कि दाल मे चूर कर खाया। पर मेरी नजर टि वी पर टीकी हुई थी। तभी देखा टाईम्स बिल्डीग के पास पोलिस सिपाही को कुछ लोग साईकिल पर डालकर ले जा रहे है। खुन बह रहा था, उस सिपाही को आतकवादी ने गोली मार दि थी।
रात भर हम दोस्त टी वी के सामने बैठे रहे। समचार देखते रहे। मैने कल रात को सुरेश के कम्पीयूटर से मेने मेरे ब्लोग
MY BLOG http://ctup.blog.co.in/ पर इस आतकवादी हमले पर पोस्ट भी लिखी एवम प्रसारित कि। रात भर निन्द नही ऑखो मे। मन बैचेन हो उठा कब सुबह हो और मै मेरे घर पहुचू। अमुमन मेरे जैसा सभी मुम्बईकरो का यही हॉल होगा ? मुझे मुम्बई मे आऐ हुये करीब 22 सालो से किछ ज्यादा ही समय हुआ है। जिवन के पहले 7 साल दक्षिण मुम्बई के कालबादेवी ईलाके मे रहता था। उस वक्त मै कुछ क्षैत्रिय अखबारो मे लिखता था। इसलिये भावात्मक रुप से इस क्षेत्र के प्रति मेरा प्यार और लगाव है।
रातभर न सोने कि वजह से मेरा श‍रीर गरम लग रहा था। सुबह 6:45 बजे चर्नी रोड से ट्रेन पकड कर घर के लिये निकला। लोकल के डिब्बे खाली खाली थे। मेरे हाथ मे कपडे से भरा एक बेग था जो मै जयपुर से आते वक्त मेरे साथ था। ट्रेन कि सिट के निचे झुककर देखा कही कुछ है तो नही। शायद यह यात्रा मै भयमुक्त होकर नही कर सकता था। क्यो कि मेरा मुम्बई अब भी उन्ह ऑतकवादियो कि गिरप्त मे था। जैसे तैसे मै बोरिवलि मेरे घर पहुचा। रास्ते मे रुकावट कही नही थी, किन्तु मनोस्थिती ने जवाब दे दिया था। सैकडो बेकसुर इस दहशतगर्दी के भेट चढ गये थे। हमेशा दोडने वाली मेरी मुम्बई आज रुक सी गई थी, सहम सी गई थी, भय से ग्रस्त थे मेरी मुम्बई के लोग।
शायद लोगो को इस हादसे से निकलने मे वक्त लगेगा। "हे भगवन लोगो कि रक्षा कर।" यह पोस्ट लिखते समय तक आज 28 /11/2008 देर शाम् 8 बजे तक हालात जस के तस बने हुऐ थे। अब तक 15 पुलिस अधिकारी, 140 आम जनता शहीद हो चुकी है ।लोग विभिन्न अस्पतालो मे 300 से 350 घायल अवस्था मे भर्ती है। मरने वालो कि सख्या और भी बड सकती है- इस युद्ध मे कोन हारा कोन जिता ? यह तो समय ही बतायेगा । हॉ पर आज मेरा मुम्बई लगडाता हुआ नजर आया।
" जय हिन्द- जय महाराष्ट्रा"
नोट-; उपरोक्त आलेख मे मृत/घायलो कि सख्या, नाम, कुछ स्थानो के नाम अन्य प्रचार माध्यमो से उपलब्ध कराये गये है। चित्र नेट से प्राप्त कि गई। बाकि अनुभव/ विचार मेरे अपने है।-महावीर

2 comments:

  1. डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर 28 नवंबर, 2008

    यह शोक का दिन नहीं,
    यह आक्रोश का दिन भी नहीं है।
    यह युद्ध का आरंभ है,
    भारत और भारत-वासियों के विरुद्ध
    हमला हुआ है।
    समूचा भारत और भारत-वासी
    हमलावरों के विरुद्ध
    युद्ध पर हैं।
    तब तक युद्ध पर हैं,
    जब तक आतंकवाद के विरुद्ध
    हासिल नहीं कर ली जाती
    अंतिम विजय ।
    जब युद्ध होता है
    तब ड्यूटी पर होता है
    पूरा देश ।
    ड्यूटी में होता है
    न कोई शोक और
    न ही कोई हर्ष।
    बस होता है अहसास
    अपने कर्तव्य का।
    यह कोई भावनात्मक बात नहीं है,
    वास्तविकता है।
    देश का एक भूतपूर्व प्रधानमंत्री,
    एक कवि, एक चित्रकार,
    एक संवेदनशील व्यक्तित्व
    विश्वनाथ प्रताप सिंह चला गया
    लेकिन कहीं कोई शोक नही,
    हम नहीं मना सकते शोक
    कोई भी शोक
    हम युद्ध पर हैं,
    हम ड्यूटी पर हैं।
    युद्ध में कोई हिन्दू नहीं है,
    कोई मुसलमान नहीं है,
    कोई मराठी, राजस्थानी,
    बिहारी, तमिल या तेलुगू नहीं है।
    हमारे अंदर बसे इन सभी
    सज्जनों/दुर्जनों को
    कत्ल कर दिया गया है।
    हमें वक्त नहीं है
    शोक का।
    हम सिर्फ भारतीय हैं, और
    युद्ध के मोर्चे पर हैं
    तब तक हैं जब तक
    विजय प्राप्त नहीं कर लेते
    आतंकवाद पर।
    एक बार जीत लें, युद्ध
    विजय प्राप्त कर लें
    शत्रु पर।
    फिर देखेंगे
    कौन बचा है? और
    खेत रहा है कौन ?
    कौन कौन इस बीच
    कभी न आने के लिए चला गया
    जीवन यात्रा छोड़ कर।
    हम तभी याद करेंगे
    हमारे शहीदों को,
    हम तभी याद करेंगे
    अपने बिछुड़ों को।
    तभी मना लेंगे हम शोक,
    एक साथ
    विजय की खुशी के साथ।
    याद रहे एक भी आंसू
    छलके नहीं आँख से, तब तक
    जब तक जारी है युद्ध।
    आंसू जो गिरा एक भी, तो
    शत्रु समझेगा, कमजोर हैं हम।
    इसे कविता न समझें
    यह कविता नहीं,
    बयान है युद्ध की घोषणा का
    युद्ध में कविता नहीं होती।
    चिपकाया जाए इसे
    हर चौराहा, नुक्कड़ पर
    मोहल्ला और हर खंबे पर
    हर ब्लाग पर
    हर एक ब्लाग पर।
    - कविता वाचक्नवी
    साभार इस कविता को इस निवेदन के साथ कि मान्धाता सिंह के इन विचारों को आप भी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचकर ब्लॉग की एकता को देश की एकता बना दे.

  2. We hate Pakistan 28 नवंबर, 2008

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आपकी अमुल्य टीपणीयो के लिये आपका हार्दिक धन्यवाद।
आपका हे प्रभु यह तेरापन्थ के हिन्दी ब्लोग पर तेह दिल से स्वागत है। आपका छोटा सा कमेन्ट भी हमारा उत्साह बढता है-