जैन दीपावली : एक विधि

Posted: 23 सितंबर 2008


जैन सस्कार विधि से दीपावली पुजन
प्रतुति : - महावीर बी सेमलानी

परम अहिसक प्रभु महावीर के निर्माण कि स्तुति स्वरुप ध्यान , तप , जप आदि तो करने ही चाहिऐ साथ ही दीपावली के अवसर पर पुजन के समय सर्वप्रथम भगवान महावीर प्रभु कि भाव वन्दना तथा अपने बही, पन्नो का प्रारम्भ करते समय रिति - रिवाज परक शब्द वन्दना हो तो अपने विचार मे महापुरुष कि पावन स्म्रति के साथ जैनत्व के सस्कार स्वतः उजागर हो जाते है ।
आवश्यक सामग्री :-
अक्षत (चावल), कुकुम, मोली (लालधागा), गुड, जल, कलश, अगरबत्ती, लालवस्त्र, पट,घी का दिपक, थाल, सिक्के, मन्गल भावना पत्रक, आदि ।
विधि:-
सर्वप्रथम पुर्वाभिमुख होकर "मगल - भावना पत्रक" को उचित स्थान पर स्थापित करे । थाल के मध्य कुन्कुम से "अर्हम"का अकन करे । पट पर लाल वस्त्र बिछा कर चावल से स्वास्तिक करे ।

सर्व मगल मागल्य सर्व कल्याणकारनम।
प्रघान सर्वघर्माणा, जैन जयन्तु शासनम ॥"

(इस मन्त्रोच्चारण के साथ स्वम के तथा परिवार के मुख्या के मस्तक पर तिलक लगाये और हाथ पर मोली बान्धे)

"मन्गल भगवान वीरो, मन्गल गोतम प्रभु:।
मन्गल स्थूल भद्राधा:, जैन धर्मोस्तु मन्गलम॥"

(इस मन्त्रोच्चारण के साथ कलम आदि के मोली बान्धे तथा उपस्थित सदस्यो के मस्तक पर तिलक करे।
(सभी सदस्य एकाग्र होकर सामूहिक रुप से निम्न मन्त्रो का उच्चारण करे)

णमो समणस्स भवगओ महावीरस्स
ॐ र्ह्नी श्री अर्हम अर्हदभ्यो नमो नमः
ॐ र्ह्नी श्री अर्हम सिद्ध्धेभ्यो नम नमः
ॐ र्ह्नी श्री अर्हम आचर्यभ्यो नम नमः
ॐ र्ह्नी श्री अर्हम् उपाघ्यायेभ्यो नम नम :
ॐ र्ह्नी श्री अर्हम् गोतमस्वाभिप्रमुख सर्व साधुभ्यो नमो नमः।।
बही खातो पर निम्नाकित शब्द अकित करे
श्री
श्री श्री
श्री श्री श्री
श्री श्री श्री श्री
श्री श्री श्री श्री श्री
श्री श्री श्री श्री श्री

णमो समणस्स भगवऔ महावीरस्स।
णमो अरिहन्ताणम,णमो सिद्धाणम, णमो आयरियाणम।
णमो उवज्झायणम, णमो लोए, सव्व साहुणम।
एसो पन्स णमुकारो, सव्व पाव पणासणो।
मगलाणम च सव्वेसि, पढमम हवइ मगलम॥

श्री भगवान महावीर जैसा दिव्य ज्ञान,
श्री गोतम गणघर जैसा भव्य ज्ञान,
श्री भरत चक्रव्रति जैसी अनासक्ति,
श्री बाहुबली जैसी शक्ति,
श्री अभय कुमार जैसी निर्मल बुध्दि,
श्री घन्ना शालिभद्र जैसी ऋद्वि- सिध्दि,
सेठ सुदर्शन जैसा शील,
श्री कयवन्ना जैसा सोभाग्य, माता मोरा देवी जैसा सुख,

श्री के लिये शुभ वीर सवत ..............विक्रम .............सवत ....................मिति ................... वार ................ दिनाक................ शुभ................लग्न.......... एव............शुभ...............नक्षत्र ................. मे श्री दीपमालिका ( महावीर जयन्ती आदि) के मगल पर्व पर भगवान महावीर के मगलमय स्मरण के साथ बही खातो का सानन्द शुभारम्भ किया।

मगल मन्त्र का उच्चारण करे ।
वीरः सर्व सुरा सुरेन्द्र महितो, वीर बुधा:सश्रिता:।
वीरेणामहितःस्वकर्म निचयो, वीराय नित्य नमः।
वीरात तिर्थमिन्द प्रव्रतनमतुल, वीरस्यो घोरतपो।
वीरे श्री- ध्रति - किर्ति - कान्ति नचयो, हे वीर। भन्द दिश

सभी उपस्थित जन-समुह सामूहिक रुप से मगल भावना के पघो का उच्चारण करे।
मगल भावना
श्री सम्पन्नो ह॔ श्याम, ह्रि श्रीसम्पन्नो ह॔ श्याम, घी सम्पन्नो ह॔ श्याम,
ध्रूति सम्पन्नो ह॔ श्याम, शक्ति सम्पन्नो ह॔ श्याम, शान्तिसम्पन्नो ह॔ श्याम,
नन्दि सम्पन्नो ह॔ श्याम, तेज सम्पन्नो ह॔ श्याम, शुक्ल सम्पन्नो ह॔ श्याम,

सभी उपस्थित सामूहिक रुप से भगवान महावीर की स्तुति करे ।


महावीर स्तुति
जय महावीर भगवान, मन मन्दिर मे आओ, धरु निरन्तर ध्यान
१ पावन नाम तुम्हारा, मन्त्राक्षर प्यारा.............. प्रभु
मेरी स्वर - लहरी पर, उठे एक ही तान.............जय महावीर
२ राग द्वेष विजेता सिध्दि-सदन नेता.................प्रभु
क्षमामुर्ति जग त्रात,मिटे सकल व्यवधान............जय महावीर
३ अनेकान्त उदगाता, अनुपम सुखदाता................प्रभु
जनम जनम के बन्धन, तोडे कर सधान............जय महावीर
४ आधि व्याधि कि माया, मिट प्रेत छाया...........प्रभु
आत्म- शक्ति जग जाऐ, लघु भी बने महान.........जय महावीर
५ भक्ति भरा मन मेरा, तोड रहा घेरा...................प्रभु
तन्मय बनकर "भिक्षु" करुअ सदा सगान............जय महावीर


भगवान महावीर स्वामी की जय हो॥
जैन धर्म की जय हो ॥
दिपावली पर्व कि जय हो ॥

0 comments:

टिप्पणी पोस्ट करें

आपकी अमुल्य टीपणीयो के लिये आपका हार्दिक धन्यवाद।
आपका हे प्रभु यह तेरापन्थ के हिन्दी ब्लोग पर तेह दिल से स्वागत है। आपका छोटा सा कमेन्ट भी हमारा उत्साह बढता है-