2009 कि हार्दिक शुभकामनाये

Posted: 31 दिसंबर 2008
चिट्ठाजगत

  • आचार्य श्री महाप्रज्ञजी का संदेसा
    मुझे प्रसन्ता है की नये वर्ष के प्रवेश कि वेला मै आपके मगलमय विकास कि कामना करता हु।भोतिक विकास के साथ आध्यात्मिक विकास अत्यन्त अनियवार्य है। हम सकल्प के साथ इस धारणा पर आये कि अध्यात्म के बिना शान्ति सम्भव नही है। आध्यात्मिक चेतना का विकास और उसका व्यवहारिक रुप है अहिसा। हम केवल शान्ति कि बात ना करे। उसमे पहले अहिसा को ह्र्दयगमन करे। हम नये वर्ष के प्रवेश के अवसर पर अतीत का अवलोकन करे । मुडकर देखे की गत वर्ष हमारा कैसा रहा ? हम गत वर्ष को ही नही बल्की आने वाले वर्ष के लिये भी शुभकामना करे ओर शुभ भविष्य कि प्रार्थना करे। अतित मै हमने क्या किया, हम देखे। भविष्य मे हम क्या करेगे ? जब तक अतित का अवलोकन वर्तमान का चिन्तन और भविष्य कि कल्पना मे सामजस्य नही होता, तब तक शान्ति की बात अपुर्ण रह जाती है।
    इस पवित्र चेतना के साथ नये वर्ष मे प्रवेश करे और नये वर्ष कि उल्लास के साथ मनाये। हमार यह उल्लास स्थायी बने और नये वर्ष के लिये ऐसी साधना सामाग्री जुटाए , जो अगले वर्ष को मगलमय और कल्याणमय बना सके।

    -: प्रेक्षा प्रणेता आचार्य श्री महाप्रज्ञजी


  • श्री श्री रवि शंकर महाराज का शंदेसा
  • 2009 का स्वागत अपनी आन्तरिक मुस्कान के साथ करे। कलैण्डर के पन्ने पलटने के साथ साथ हम अपने मन के पन्नो को भी पलटते जाये। प्रायःहमारी डायरी स्मृतियो से भरी हुई होति है। आपदेख कि आपके भविष्य के पन्ने बीती हुई घटनाओ से न भर जाये। बीते हुये समय से कुछ सिखे, कुछ भुले, और आगे बढे।
    इस बार नव वर्ष के आगमन पर पृथ्वी पर सभी के लिये शान्ति तथा सम्पन्नता के सकल्प के साथ शुभ कामनाये दे। आतकवाद के छाया तथा बाढ तथा अकाल के समय मे और अधिक नि:स्वार्थ सेवा करे। जाने कि इअस ससार मे हिसा को रोकना ही हमारी प्राथमिक उद्देशय है, तथा विश्व को सभी प्रकार कि सामाजिक तथा परिवारीक हिसा से मुक्त करना । समाज के लिये और अधिक अच्छा करने का सकल्प ले, जो पीडित है उन्हे धिरज दे। राष्ट्र-समाज-परिवार के प्रति उतरदायी हो।
    :- श्री श्री रविशकरजी महाराज
  • हे प्रभु यह तेरापथ के परिवार कि ओर से नये वर्ष की हार्दिक शुभकामनाये।
    जहॉ थे वहॉ से कुछ आगे बढे,
    अतीत को ही नही भविष्य को भी पढे,
    गढा है हमारे धर्म गुरुओ ने सुनहरा इतिहास ,
    आओ हम उससे आगे का इतिहास गढे।
  • 2
    पुरब मे हर रोज नया, सूरज अब हमे उगाना है।
    अघिकारो से कर्तव्यो को, ऊचॉ हमे उठाना है ।
    ज्ञान ज्योति से अन्तर्मन, के तम का अब अवसान करना है।
    छोडो सहारो पर जीना, जिये विचारो पर अपने ।
    सही दिशा मे शक्ती नियोजिन, करे फले सारे सपने ।
    स्वय बनाये राह, स्वय ही चरणो को गतिमान करे।
-:महावीर बी सेमालानी "भारती"
(फोटू देखने के लिए उस पर चटका लगाए )
मारी ग्रुप्स की सभी कम्पनी की और से नव वर्ष की शुभकामना
सिमको पोली टेक्स -
सायर टेक्स इन्डरस्ट्रीज,
प्रेक्षा ईन्ट्ररप्राईजेज इण्डिया लिमिटेड
रेडियन्ट इवेन्ट आफ इन्ट्ररनेशनल फेयर
रेडियन्ट फैबरीक्रियेशन
चैनल (कल्यान/ न्यु मुबई/भिवन्डी
)स्टार इन्डियॉ न्युज





गान्धीजी का मोर्डन आर्ट खादी ओर तीन बन्दर

Posted: 27 दिसंबर 2008
चिट्ठाजगत
गान्धीजी का मोर्डन आर्ट खादी ओर तीन बन्दर
ने १९४५ मे ख्याल आया कि मेरे मरने के बाद मेरे पुतले बनेगे। और मेरे नाम पर सडको के नाम तो जरुर होगे। उन्होने सोचा कि यह भी वेल डिजाइन्ड होना चाहिये तो उन्होने पुतला बनाने कि पैक्ट्रिस शुरु कि और अपनी हेड राइटिग कि तरह ही मुर्तियॉ और पुतले बनाये। बनाने चले थे कुछ ओर ही लेकिन बन गऐ बन्दर। वह भी एक नही, दो नही, पुरे के पुरे तीन बन्दर । एक बहरा, दुसरा गुगा, तीसरा अन्धा। मन्त्रियो कि गीता उन्होने यही पर पैदा कर दी।जिस तरह मोर्डन आर्ट मे देखकर विचार करते व फैसला करते ठीक उसी तरह यह गॉन्धीजी कि 'मोर्डन-आर्ट थी।
इसका मतलब मन्त्रियो को अपनी अक्ल के हिसाब से इसके भावो को लेना था। इसीलिये उन्होने मन ही मन फैसला किया
"
कुछ ना सुनो", कुछ ना देखो", कुछ ना बोलो",
खादी गाधीजी ने बेचने के लिये बनाई यानि ग्रामिण उधोग के हिसाब से बनाई थी न कि पहनने के लिये । मन्त्रिगण इस मे मार खा गये। अच्छे से अच्छा वस्त्र के होते हुऐ भी खुद खादी या खादी जैसे दिखने वाले वस्त्र पहनकर घुम रहे है। यह तो ऐसी मिशाल हुयी जैसे किसी के घर मे लडकी की शादी हो और और बरात आने मे लेट हो जाये तो सारा खाना खाकर खुद ही सो जाये । दुल्हे का बाप भले ही रात भर दरवाजा ठोकता रहे । तीन का आकडा गान्धीजी का बडा फेवरेट है। गान्धीजी का स्थान बाद मे ईन्दराजी ने लिया। पर अपोजीशन की त्रिनेत्र सदा परेशान करती रही । हमारी सरकार मे मुख्यत दो पार्टीयॉ>>>>काग्रेस जितनी है उनकी सबकी वेशभुषा तकरीबन एक जैसी है, फाइव स्टार के स्टाफ की तरह। जबकी अपोजिशन मे सबकी वेशभुषा अलग-अलग है, इरानी हॉटल मे सभी वेटर की तरह।
हम भी रोड अपने नाम करवायेगे चने खाकर
जैसे एक बार एक आदमी ने दुसरे महाशय से पुछा-"जनाब,आप बडे शान्ति व सुखी दिखाई पड रहे है।" आप किस मार्ग पर चलते है?" तो उसने अपने दोनो दॉतो के छुपानेका सफल प्रयास करते हुये ह्सते हुये कहा-" भाईजी! महात्मा गान्धी मार्ग पर, वह भी इतना जितना महात्मा गान्धी खुद नही चले थे। कारण मेरे दफ्तर से घर का जहॉ से रोज पद-यात्रा करता हु उसका नाम है, श्रीमान>>>>>>> "महात्मा गान्घी मार्ग" इसलिये अपोजीशन की आवाज और भाषणबाजी सदा बा-आवाजे बुलन्द रहती है; एक किरायेदार कि तरह । रुलर पार्टी हमेशा शान्ति रखती है, एक लैन्डलार्ड कि तरह।
एक राजनेता ने तो यह भी कहा कि - जनता को रोज भीगे चने खिलाने चाहिये, क्यो कि घोडो कि प्रिय खुराक है। इसी तरह सभी घोडो कि तरह फुर्तीले हो जायेगे। पर जरा चने उल्टे पड गये, कुछ चने नेता जी खुद खा गये ।इसलिये वह बडे ही फुर्ती से आये और चले भी गये। क्या करे? दुनियॉ मे कुछ करना भी तो है । इसी कारण अपनी सुरक्षा मे सरकारी खजाने कि चॉबी अपने पीठ के निचे रखकर सोते है। बेफोर्स कि तोप कि तरह । क्यो कि हमारे नेता जानते है कि आज कि नगी भुखी, प्यासी, आतकवाद से त्रस्त, आर्थिक मन्दी से परेशान, शेयर बजार एवम मेटल मार्कट मे अपने तपड साफ कराने के बावजुद आज कि जनता ब-अदब होसियार है। चले थे रोड अपने नाम करवाने, पर खुद ही रोड पर चले गये। वह अब सोचते है कि रोड पर चलना और रोड अपने नाम करवाना दोनो अलग अलग बाते है। देखो! अब वो मोर्च मे घुम रहे है। (विनोद राजपुरोहित)
लाल पिले गान्घीजी की घुम दफ्तरो मे,
नीले गान्घीजी पान कि दुकान पर
क सामायिक चिन्तन से युक्त कुछ उदेश्य पुर्ण विचार मन मे आये तो घिसट डाला। विकृतियो से दम घुटता है। मन कभी छटपटाने लगता है। स्वस्थ-व्यग्यात्मक-भावपुर्ण- शैली मे राष्ट्र प्रेम को जगाने का तुच्छ प्रयास है। इसमे अपना दर्द छुपा है। और दर्द से लेखाकारो का गहरा नाता होता है। अफसोस है कि हम स्वतन्त्रा के ६० वर्षो के बाद भी आजादी कि मुल खुशबु को नही महसुस कर पाये। देश के राजनितिज्ञो कि कार्य सिद्धि देख तो अपने आप से डर लगने लगा है । लम्बे नाक वाले सफेद
बुगले भगत; जो एक टॉग पर खडे होकर सदैव छोटी मच्छलियो का शिकार करने कि ताक मे रहते , अफसोस तो इस बात का है यह कुर्सी के गुलाम तो मर्यादाओ-नैतिकता को ताक मे रखकर हर छोटे बडे , अपने लोगो को फासने का कार्य करते है। विघमान है,हर क्षेत्र मे शोषण की बू आती है। किसी भी सरकारी दफ्तर मे चले जाये वहा भी गान्धीजी के सिवा कुछ नही चलता। वो भी सिर्फ ओर सिर्फ "लाल गान्घी" और पीले कलर के गान्घीजी ही चलते है (लाल- १००० का नोट, पीला ५००, निला १०० का नोट)। नीले गान्घी जी कि वैल्यु सरकारी दफ्तोरो मे नही है, यह पान कि दुकाने मे पान खाते समय ही उपयोग मे आते है.................
सरकारी कार्यालयो मे
रिश्वत लेने वाले
ये राजनेताओ कि
लावारिस सन्ताने लगती है
या उनके ऐजेन्ट ?

"लोगो का कहना है- हम कैसे मनाये क्रिसमस"

Posted: 23 दिसंबर 2008
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म एक ओर क्रिसमस मनाने की तैयारी मे जुटे है। देश और दुनियॉ बडते क्राईम बैरोजगारी, आतकवाद वैश्विक आर्थिक मन्दी एवम कर्ज से जुझ रहा है। लोगो मे चर्चा का मुद्दा है गिरते हुऐ नैतिक मुल्य का। बहुत से लोगो का कहना है हम कैसे मनाये क्रिसमस को जबकि हमारे घरेलु आर्थिक स्थिति एवम सामाजिक स्थिति चरमराई हुई है। क्या क्रिसमस मनाने से मेरे घर कि स्थिति ठिक हो जायेगी ? बहुत सारे घरो मे क्रिसमस का एक समय का भोजन भी नसीब नही होगा। कई माता पिता अपने बच्चो को वो तोहफे भी नही दे पायेगे जो वो देना चाहते थे। यह ऐसा क्यू ? वो इसलिये कि जो समाज हमारी सन्सकृति कि ‍रक्षा करता था, लोगो का उस समाजिक व्यवस्था पर से भरोसा उठ गया है।
माजिक एवम सरकारी व्यवस्था से लोगो का शायद इसलिये भरोसा उठ गया है क्यो कि आप और हम कई मर्तबा धोखा खा चुके है। ऐसे समय पर हमारे विश्वास को कई बार चुनोति दी गई जब ससार आर्थिक तकलिफो से परेशान है। पुरी व्यवस्था मे अपराघियो का आधिपत्य हो गया है। आतकियो कि दशहतगिरी, एवम सत्ता मे बैठे लोगो कि कारगुजारियो ने सभी त्योहारो को एवम उसकी महत्ता को फिका करने कोशिस रग लाती नजर आती है। क्यो कि लोगो के समुह से बना समाज और शासक लोगो के प्रति अपने दायत्व को खुटी मे लट्का दिया है।
म्भवत अब लोगो के लिये आम जिवन मे हिसा, आतक, गरीबी, लुटपाट, बलात्कार, मामुली घटना बन कर रह गई है। क्या समाज मे शान्ति को फिर से स्थापिथ क्या जा सकता है ? तो मेरा जवाब है-"हॉ' हॉ" । हमे सरलता एवम सहजता से अपने विचारो को जिसस क्राईस्ट के सन्देश के साथ मिलाना होगा।
Jesus said, “Peace I leave with you, my peace I give unto you: not as the world giveth, give I unto you। Let not your heart be troubled, neither let it be afraid।” (John 14:27)
मे तकलिफो कि घडी मे, उजाले कि एक किरण नजर आती है और वो है हमारे गुरुओ द्वारा स्थापित वैचारिक मुल्य मे। उनके आदर्शो को त्याहारो के माध्यम से एक दुसरे मे बाटकर हम आपस मे अपना भला करने मे सक्षम हो सकते है
क्रिसमस का त्योहार हमे हमारी तकलिफो को सहन करने कि शक्ति को ओर प्रभावि बनाता है। हमसे ज्यादा गरीब लोगो कि मदद करते हुए हम क्रिस्मस कि सच्ची भावना को मह्सुस कर सकते है। इसीलिये क्रिस्मस को मनाते हुए, हम अपने मित्रो और आस-पडोस के लोगो को याद करते है जिन्हे हमारि मदद कि बहुत जरुरत है। हमे ईसु कि स्थापित की हुइ शान्ति एवम अच्छाई को समाज देश दुनिया मे, हमारे लोगो के बीच लेकर जाना चाहिये
और इसके लिये क्रिस्मस से अच्छा मौका नही मिलेगा। हमे सभी धर्मो एवम धर्माचार्यो का शुक्रिया अदा करना चाहिये उनके दयाभाव और प्यार के लिये।
गर हम सभी ऐसा करते है तो हम 2009 मै कई चिजो मे बदलाव देखेगे, एक बद्लाव जो लोगो मे विश्वास लायेग, शान्ती लायेगा, समाज देश और दुनियॉ मे एकता लायेगा। और यह एक ऐसा बदलाव होगा कि इस दुनियॉ का अच्छा करेगा । एक ऐसा बदलाव जिसमे आपस मे भरोसा बनेगा। कही कोई डर नही रहेगा। भयमुक्त समाज कि सरचना हो पायेगी। लोग प्यार मोहब्बत से सभी धर्मो के त्योहारो को मनायेगे। सभी के घर मे चुल्हा जलेगा। तभी किसी महान पुरुष कि याद मे मनाये जाने वाले त्योहारो कि सार्थकता बनी रह सकती है।
सार मे सभी को मेरे और मेरे परिवार कि ओर से हेपी Christmas
प सभी के लिये क्रिस्समस का यह त्योहार खुब खुसियॉ आपस मे प्यार, अच्छे स्वास्थय एवम मगलमय जीवन प्रदान करे यही मेरी कामना प्रभु से है।।




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आज ताज, "वाह ताज" बनने जा रहा

Posted: 20 दिसंबर 2008
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यह मुम्बईकरो का जीवट ही है कि आतकी हमलो के एक महीने से कम अन्तराल के कम अन्तराल के अन्दर मुम्बई की शान ताज होटल और ट्राइडेन्ट होटल मरम्म्त और फर्निशिग के बाद आज अर्थात २१ दिसम्बर रविवार को पुनः शुरु हो रहे है। सबसे रोचक बात यह है कि री-स्टार्ट के पहले ही दिन उन मेहमानो मे ज्यादा उत्साह है जो आतकी हमले की शाम वहॉ खाना खा रहे थे या ठहरे हुये थे। वे चाहते आज जब इन हॉटलो मे फिर से हलचल लोटे तो उन लम्हो को वे अपनी पलको मे सन्जो सके।
१०० साल से ज्यादा पुराने ताज हॉटल को आज शाम ७-३० बजे दोबारा खोल दिया जायेगा। रेस्टोरेन्ट और बार जैसे शामियाना, मसाला क्राफ्ट, एकुआरिस, सूक, स्टॉरबोर्ड, ला पैटिसायरी और जोडियेक ग्रिल, सभी शुरु हो जायेगे। इन रेस्टोरेन्ट और इटरीज को ऑतकवादियो ने तहसनहस कर दिया था। यह वही नालन्दा बुक स्टॉल है, जिसमे शरण लेकर उस दिन कई मेहमानो ने अपनी जान बचाई थी।
आज ताज ने आतकवादियो को हरा दिया । पुन अपने पैरो पर सीना तान खडा है ताज। अपने सिर पर मुकुट (ताज) धारण कर आतकियो को बता दिया है कि वो इस थोथे हमलो से डरने वाला नही, यह भारत माता का मुकट है, और उसका नाम ताज है। नये ताज मे २६८ कमरे है, जिनका एक रात मे किराया हजारो मे होता है मेहमानो के लिये खोल दिये जायेगे। इन्ह रुम मे ९ सूट और २६ ताज कलब रुम है।
यह एक हेरिटेज इमारत है पर अब यह भारत का ताज बन गया है। ताज अब हमारा गोरव है। सेकडो विदेशीयो ने भारत आकर ताज को सलाम करने कि ईच्छा जता चुके है, जख्मो को अपने प्यार से भरना चाहते।
वेसे तो ताज मे जाने का अवसर बहुत बार मिलता रहा मुझे। हम इन्टरनेशल इवेन्ट आयोजित करते है और हमारे कलाईन्ट विदेशी है। अर्थात हमारी मिटिग का स्थल कभी-कभी यहॉ भी होता है। २२ जनवरी से २५ जनवरी को मेरी कम्पनी इन्टरनेशल फैशन ज्वेलरी का शो NSC ग्राऊन्ड मुम्बई मे करने जा रही है और हमारे बहुत से विदिशी और भारतिय मेहमान भी यहा रुकने वाले है। कहने का मतलब यह है कि व्यापार कि दृष्टि से हॉटल ताज मे जाना होता रहा है, पर कभी भी ताज को खुली ऑखो से नही देखा। कभी कभी शिष्टाचार कि वजह से भी सेवन स्टार हॉटल और सेवन स्टार मेहमान के कारण, मेरे मन को यह सभी देखने करने के लिये रोकना पडता है। आज मेरी ईच्छा है कि मै अकेला ताज जाऊ, उसे देखू । उससे पुछु कैसे हजारो गोलियो का सामना किया ? उसके दर्द को अपने हाथो से सहलाना चाहता हु। मै ताज के लहुलुहान हुये दिल से कहना चाहता हु यह तेरी नही पुरे भारत और भारत कि जनता कि लडाई है । मै कुछ समय रुक कर चाव से ताज को देखना चाहता हू। देखो कब जाना होता है।
ओबेरोय समुह कि ट्राइडेन्ट होटल भी आज ही पुनः शुरु हो रहे है। इस हॉटल मे टिफिन और कन्धार नाम से महसुर रेस्टोरेन्ट भी मरम्मत के बाद आज ही शुरु हो रहे है। यहॉ का कॉफी शॉप भी शुरु हो रहा है। इस पल को ससार देखना चाहता है इस खुशी के माहोल मे दुनियॉ भागिदार होना चाहती है। किन्तु ताज मेनेजमेन्ट ने कल २० दिसम्बर को प्री-ओपनिग पार्टी दि, जिसमे कर्मचारी ही शामिल हुऐ। पुरा स्टाफ रात दिन से जि जान से काम कर रहे है यह उनके कठोर परिश्रम का फल है कि आज ताज, "वाह ताज" बनने जा रहा है ।
आओ आज से नए ताज कि शुरुआत करे,
अतित को भुल नये सिरे से बात करे।
आओ हम नये युग का निर्माण करे,
आओ हम नये क्षितिज का अनुसघान करे,
क्यो कि आज हम भी ताज को सलाम करे॥








चाय कि केतली बनी ११ लाख की देवी

Posted: 16 दिसंबर 2008
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क लावारिस पत्थर मे भी आस्था के फुल खिलाया जा सकता है इस बात को सत्य घटित होते हुऐ मेने उसे साकार रुप दिया। पिछले चार वर्षो से मै CTUP MUMBAI नामक सस्था के मन्त्री के रुप मे काम कर रहा हु। इस सस्था मे हमारे पेतृक गॉव के 150 परिवार के 1000 लोग सद्स्य है। तेरापन्थ जैन धर्म एवम आचार्य महाप्रज्ञजी के विभिन्न कार्यो मे सामुहीक रुप से भाग लेने अथवा धार्मिक, सामाजिक गतिविधयो मे योगदान हेतु सस्था कि स्थापना 19 फरवरी 2005 को मुम्बई मे कि गई । सस्था प्रति वर्ष जहॉ भी आचार्य महाप्रज्ञजी का चातुर्मास होता है वहॉ, दर्शनार्थ मुम्बई से सघ का आयोजन करती है। अहमदाबाद (गुजरात), भिवानी (हरियाणा), महरोली (नई दिल्ली), सिरियारी (राजस्थान), उदयपुर (राजस्थान), इसबार जयपुर कि यात्रा का आयोजन कर चुकि है। इसके अलावा आचार्य महाप्रज्ञजी का अवदान जिवन-विज्ञान विभीन्न स्कुलो मे सस्था द्वारा कक्षा 1 से 8 तक शिक्षा मे सम्मिलित करवाकर प्रायोजित किया जा रहा है इस समय मे विभीन्न स्कुलो मे सैकडो बच्चे जिवन विज्ञान शिक्षा को ग्रहण कर रहे है। हमारी सस्था इसके अलावा शिक्षा के अलावा कम्पुटर सेट, नोट बुक, टेबल कुर्सी , खेलने का समान भी अपने विवेक से प्रदान करती है।
ह सब तो ठिक है मजे कि बात तो यह है कि इस बार 30 oct।2008 को आचार्य श्री महाप्रज्ञजी के दर्शन हेतु जयपुर जाने का कार्यकम सुनिश्चत किया। सदस्यो को सुचित किया गया कि 30 oct.2008 से 04 Nov 20087 को गुरु दर्शन हेतु जयपुर यात्रा का आयोजन किया गया है अतिशिघ्र अपने परिवार के सदस्यो का नाम दे ताकि ट्रेन मे आरक्षण हो सके। दो चार दिन मे ही 103 यात्रियो के नाम आ चुके थे। आवास- प्रवास हेतु अलग अलग व्यवस्थापको कि नियुक्तियॉ कर दि गई।
मेरे जिम्मे था मच सचालन, एवम सस्था की त्रिमासिक मेगजिन चाणोद-दर्पणा का प्रकासन करना।
मेरी पत्नि को कार्य मिला था सास्कृतिक कार्यकर्मो को विभीन्न आयु वर्गो के हिसाब तैयार करवाना।
मुम्बई मिटीग मे सस्था सदस्य जयप्रकाशजी को कहा गया कि आपके घर से 100 कप चाय वाली केतली लेकर आना ताकि ट्रेन मे चाय देने को काम आऐगी। तब उन्होने कहा रोज रोज चेम्बुर घर से उठा कर लाने मे तकलिफ होती है, सस्था को नई केतली खरीद लेनी चाहिये। निर्णय लेकर सस्था के अन्य सदस्य गोतमजी को नई चाय कि केतली लाने को कहा गया। (गोतमजी के भुलेश्वर मुम्बई मे स्टील की दुकान है।)
30 oct.2008 मुम्बई सेन्ट्र्ल से शाम 7 बजे जयपुर सुपरफास्ट से रवाना हुऐ। दुसरे दिन दोपहर को गुलाबी नगरी पहुच गये। वहॉ से बस द्वारा हमारे निवास के लिये आरक्षित अग्रवाल भवन मे पहुचे। दस रुम और दो बडे हॉल मे हम सभी रुके। हमारा अपनी केटरिग व्यवस्था थी। क्यो कि हमे यहॉ चार दिन ठरना था। यही पर खाना नास्ता बनता था। आचार्य महाप्रज्ञजी जी का चातुर्मासिक स्थल अणुविभा केन्द्र यहॉ से 1 km दुर था। हमने जयपुर पहुचते ही गुरुदेव के दर्शन हेतु गये। हजारो लोग कतार मे थे। उसमे हमारी सस्था CTUP के 100 लोग भी थी। कतार आगे बडती गई हमारा नम्बर आया हमे सेवा दर्शन का 15 मिनट का समय दिया गया। मेने मच को सम्भाला और गुरुदेव कि तरफ मुखातिब होते हुऐ सस्था सदस्यो का सस्था के कार्यो का विवरण पेश किया।
चार्य महाप्रज्ञजी जी ने कहा ctup के कार्यकर्ता धर्म सघ एवम गुरु के प्रति निष्टावान है। सामाजिक क्षेत्र मे भी अच्छा कार्य कर रहे है।"
वा
पिस आवास स्थल अग्रवाल भवन पहुचे। सभी ने खाना खाया सबसे पहले महिलाओ ने एवम बच्चो ने खाना खाया। उसके बाद हम सभी हॉल मे एकत्रित हुऐ।
गोतम भाई ने नई नवली चाय केटली कि बात छेडी। अभी तक सिल पेक थी। उसके उपर का फुटे का कवर ज्यो का त्यो था। मैने कहॉ कि चाय कि केटलि कि मोहर्त बोली लगाई जाये जो भी २१००/ या २५००/ रुपया आयेगा तो सस्था को फायदा होगा। और जो सबसे ऊची बोली लगायेगा उस सदस्य का नाम या उनके माता पिता का नाम अकित होगा। मैने कहा -" जो भी भाग्यशाली होगा वो ही ईस पर अपना या अपने पुर्वजो का नाम लिखा पायेगा। व्यक्ति ससार से चला जायेगा किन्तु यह नाम अमर हो जायेगा। यह केटलि कई वर्षो तक सस्था कि यात्राओ मे चाय पिलाती रहेगी। तब लोग दानदाता को याद याद करते रहेगे।
भी लोगो मे उत्साह का सचार करना मेरा मकसद था। लोगो मे जोश चढ आया। प्रकाश भाई १०१ से बोली चालु कि। किसीने ५०१, फिर महेन्द्र ने direct Rs11000/ .कि बोलि लगाई लोगो ने सोचा नही था कि 1500/ कि चाय की केतली 11000/ कि बोली मे चली जायेगी। लोगो मे जोश हिलोरे खाने लगा। बिच बिच मे मै बोलता रहा आप अमर हो जायेगे इस पर नाम मेरी बात आग मे घी का कार्य किया। अशोक कोठारी ने Rs, 13,313/ कि बोलि लगाई (तेरह का अक हमारे मे शुभ मानते है) मेरे बडे भाई राजेन्द्रजी सुरत ने 35000/ कि बोलि लगाकर लोगो को केतलि कि शक्ति का अभास होने लगा। केतलि कि महिमा फैलने लगी। दिनेश 51000 / - प्रकाशजी 55000/
दिनेश फिर से 81000 / लोग भोचक्के रह गये। अब यह महज 1500/ कि चाय की केतली नही रही अब तो महिमा मण्डित केतली-देवी के रुप मे प्रतिष्टित हो हो गई। रात के 11:30 बज रहे थे लोगो का उत्साह बड रहा था।
मैने आव देखा न ताव मोके का फायदा उठाकर केतलि-माता को शॉल ओडा दि एवम माला पहना कर लोगो मे केतलि-माता के प्रति आस्था कि नीव ओर गहरी करने कि कोशिश कर रहा था। मैने कहा बोलो "केतली-देवी कि जय" पुरा अग्रवाल भवन जय जयकारो से गुजित था। सदस्यो के बढते उत्साह को देख मेरे मन मे आया कि केतलि देवी कि बोली को थोडे समय रोक कर सस्था के दुसरे खर्चो के लिये भी धन ईकठा किया जाये।
मुम्बई मे सम्मेलन के लिये मोतिलालजी ने 255000/
ओर भिकमचन्दजी ने 105000/
कुल 360000/रुपया एकत्रित हुऐ।
अन्य कार्यकर्मो के लिये सदस्यो द्वारा 415025/ रुपया एकत्रित हुऐ।
केतलिदेवी कि बोलि फिर से शुरु कि गई।
केतलि देवि पर नाम लिखाने के लिये बोलि फाईनलि प्रकाश़जी ने 101000/ मे ली।
अब तक आठ लाख 76 हजार सस्था की झोलि मे आ गये थे। एक महज चाय कि केतली कि महिमा मण्डित करके लोगो को उत्साहीत करने का कार्य मेने किया वो ठीक था या नही पर मैने सामाजिक सेवाओ के अन्तर्गत इस कार्य को पुरा किया। पर मेरे मन मै एक टीस थी मैने सोचा एक लाख देनेवाले के पुर्वजो का नाम एक चाय कि केतली पर नाम लिखाना उचित सम्मान नही लगा। अत मेरे दिमाग मे ओर आईडियॉ आया । अध्यक्ष से सलाह करके लोगो कि भावनाओ का आदर करते हुऐ केतलीदेवी पर जो नाम लिखने वाले थे वो अब सस्था के चाणोद भवन मे एक नया कमरा निर्मित कर के प्रकाशजी मोहनराजी का नाम सुनहरे अक्षरो मे लिखा जायेगा यह घोषणा करते ही अशोक ने एक लाख चाणोद भवन के लिये देने कि घोषणा कि, तुरन्त ही अमृतजी ने भी ईक्कावन हजार चाणोद भवन के लिये देने कि घोषणा कि। अब तक कुल दस लाख 28 हजार सस्था के खाते मे मेने झोड दिये थे।
वा तीन बजे थे। लोग -बाग चाय पि रहे थे। मैने लोगो कि आस्था के प्रति अपना सम्मान दर्शाते हुये एक बार जोर से बोला -
" बोलो, केतली-देवी की-जय हो।"


शहशाह दुखी- बादशाह भी डरे- आमिर खान आरपार कि लडाई के पक्षधर॥॥

Posted: 06 दिसंबर 2008
चिट्ठाजगत
बादशाह को भी डर
हि
न्दी सिने जगत के सुपरस्टार बदशाह शाहरुख खान मुम्बई मे हुऐ आतकवादियो के हमले से सहमे हुये है, उन्हे अब डर लगने लगा है, अपने परिवार एवम बच्चो के लिये। बादशा खान आगे कहते है -"देश बडे ही डरावने समय से गुजर रहा है। जनता का गुस्सा स्वभाविक है। यह डर मुझे ही नही पुरे हिन्दुस्थान का है। ऑतकवादियो से कहते है-" तुम भुल गये हो अल्ला के ईस्लाम को, अल्ला के ईस्लाम को जानिये। कुरान बाईबल या गीता किसी मै यह नही लिखा है कि ईन्सानो को मार कर कोई जनत मिलती है। कुरान मे कही भी इस तरह के घिनोने कृत्यको जगह नही दि गई है। दो तीन शाल पहले मै ईस्लाम को ऑतकवाद नही मनता था ,अब मै कहता हु कि जो ऑतकवादी है वो ईस्लामीक नही है। मुझे मेरे देश के लिये अब अधिक समय निकालना है क्यो कि यह बडा प्यारा है। शाहरुखन ने यह बात IBN7 के राजीवसरदेसाई को दिये ईन्टरव्यू मे कही।

राजनीतिक दल है जिम्मेदार_ आमिर खान
मु
झे और मेरे बच्चो को आतकवादी बन्धक बना ले तो मै
अपनी सरकार से यह कहने के लिये मानसिक रुप से तैयार रहुगा
मेरे बच्चो की परवाह न करे, और देश के व्यापक हीत मे आतकवादियो को मार गिराये।-आमिर खान
मुम्बई। आमिर खान का मानना है कि आतकवाद को बढावा देने के लिये सभी राजनीतिक दल जिम्मेदार है और आतकवाद केवल एके ४७ से ही नही फैलाया जाता बल्कि हर वह काम, जिसमे आम आदमी के दिल मे दहशत पैदा हो आतक कि श्रैणी मे आता है। और इसे रोकने के लिये जरुरी है कि आतकवादियो से किसी कि जान के बदले मे कोई सोदा नही किया जाये।
आमिर ने अपने ब्लोग मे लिखा है इस घटना से पहला सबक तो यह मिलता है कि हमे आतकवादियो के साथ कोई सोदे-बाजी नही करनी चाहिये। आतकवादियो को यह स्पष्ट सन्देश दिया जाये कि भारत आतकवादियो से कोई समझोता वार्ता नही करेगा। इसका साफ मतलब है कि भविष्य मे अगर कभी इस तरह के हालात बनते है कि मुझे और मेरे बच्चे को कुछ आतकवादी बन्धक बना ले तो मै अपनी सरकार से यह कहने के लिये मानसिक रुप से तैयार रहुगा मेरे बच्चो की परवाह न करे और देश के व्यापक हीत मे आतकवादियो को मार गिराये।
आमिर खान ने आगे अपने ब्लोग मे लिखा है -"काग्रेस और भाजपा सरकारे आतकवाद से निपटने मे नाकाम रही है। मुम्बई पर आतकी हमले ने काग्रेस नीत युपीए की अक्षमता जाहीर कर दी, जबकि भाजपा शासन काल मे इण्डियन एयरलॉइस के अपहरण कि घटना ने सरकार को लासार बना दिया था।
स घटना मे बन्धको को छुडवाने के लिये राजग सरकार ने जिन्हे रिहा किया वह तीन खतरनाक ऑतकवादि और पाचो अपहरणकर्ता भारत को एक बार फिर निशाना बनाने की तैयारी करने लगे। इससे पहला सबक यह मिलता है कि हमे किसी भी हालत मे आतकवादियो से कोई सोदा नही करना चाहिये। (NBT ४१२२००८)

टुट चुका है बान्ध : अमिताभ
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म्बई। बालिवुड क्र दिग्गज अभिनेता अमिताभ बच्चन ने मुम्बई बम हमलो को लेकर उत्पन्न जनाआक्रोश कि तुलना एक ऐसे बान्ध से कि है जो फूट गया है और उसमे से अनियन्त्रित पानी लगातार बह रहा है।
भिताभ ने अपने ब्लोग मे लिखा है कि इन हमलो से देशवासी बहुत व्यथित और गुस्से मे है। यह व्यथा और गुस्सा किसी न किसी रुप लगातार जाहिर होता जा रहा है। उन्होने लिखा है कि किसी भी लोकतान्त्रिक व्यवस्था मे निर्वासित प्रतिनिधियो और देश को चलाने के लिये प्रशासन कि जरुरत होती है। आज जो हालात है, उनमे राजनितिज्ञो और प्रशासन दोनो के लिये उदासीनता के भाव है। हर जगह केवल सवाल उठ रहे है। अभिताभ ने आगे अपने ब्लोग मे लिखा है कि विश्वास कि कमी और खिझ दिखाई पड रही है। खिझ का कारण विश्वास टुटना नही है खिझ इसके लिये है क्यो कि समाधान देने वाला कही दिखाई नही दे रहा है।ऐसा लगता है बान्ध टुट चुका है
(NBT 4122008

I want to do something, but what can I do?” करन जोहर

फिल्म निर्मात अपने ब्लोग मे क्या कहते है देखे। वो दुखी है मुम्बई अटैक से। वो कहते है पहले अपने घर परिवार के आपसी रिस्तो मे विश्वास पैदा करना पडेगा। एक दुसरे को समझना पडेगा। हमे एक साथ आतकवाद से मुकाबला करना होगा। देखे वो आगे क्या लिखते है -"I was in New York when news broke that Bombay was under attack.For someone who’s been born and raised in this magnificent city, this is easily one of the most shattering things to hear - and see. And that’s all I could do. Glued to my television in a hotel room far too far away from where this massacre was taking place, I absorbed everything I saw and everything I heard. Everyone had a sound byte. Everyone had to come out and express his or her opinion; The NSG should be applauded. The Media should be praised. Certain politicians should be bashed. I agree with most of what’s already been said. Some have been eloquent and some have sounded like loud, misinformed banshees. Collectively we’re grappling with the ineffectiveness of the system and what was presented to us as information. Politicians, soulless and emotionless, were addressing the country while reading off of Teleprompters. Can you not feeling anything? Can you say nothing to make us feel just a little more secure in your hands? .
I can’t offer a unique perspective on this yet because my grievances at this moment are primarily observations on humanity. The most common thing I hear from people is, “I want to do something, but what can I do?” The answer to this question has resulted in candlelight vigils and sms’s to wear black clothes or light a candle in our windows to show support and solidarity. It’s all very well and good because it is therapeutic. Our natural instincts veer us towards acting out – or at least towards being more active. In times like these, it becomes a challenge to look at the big picture. Terror attacks, massive loss of life – the reality eventually forces you to look at how we react individually and as a collective community.
Our focus has now shifted to something so much bigger than us, but in order to fight this fear, in order to regain confidence as a city, we must strengthen ourselves. We must fix our problems at home before we can tackle attacks from outside

आतकवाद के खिलाफ शास्त्रीजी ने ऊठाई मशाल ए कलम॥।

मैने कल सारथी चिट्ठे पर शास्त्रीजी कि आतकवादियो के खात्मे कि मुहिम को पढा। मै उनकि इस लडाई मै मेरी सहभागिता जताई। फिर सोचा यह तो लिखने लिखाने कि बात रह जायेगी। आतकवादियो के खिलाफ इस मुहिम मे हर व्यक्ति को अपने अपने ढग से योगदान देना चाहिये। क्यो कि आप और हम बन्दुक उठाकर सिमा पार तो जा नही सकते है। हॉ इतना तो जरुर कर सकते है कि पुरे देश मे आतकवादियो के खात्मे कि जन लहर पैदा करे। सरकार को मजबुर करे कि अमेरिका कि नहसियत को मारो गोली और सीधे आक्रमण करो पाक पर, नेस्तोनाबुद कर दो उन्ह ठिकानो को जहॉ से आतकवादि जन्म लेते है। सोनियाजी॥ झॉसी कि रानी बनने के लिये समय अच्छा है उपयोग करो देश याद करेगा आपकोलोगो के मनो मे क्रान्ति कि एक लहर पैदा हो इसलिये उपरोकत विचारो कि प्रस्तुति देकर यह मेरा छोटी सी तमन्ना को पुरा कर रहा हु। शास्त्रीजी आपने जिस कलम को बदुक का रुप धारण कराया है यह हम ब्लोग बिरादरी के लिये फक्र गर्व कि बात है कि हम भी देश कि इस लडाई मे पिछे नही है। महावीर